पाण्डुलिपि और वेद

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पपाण्डडललिलप और ववेद-पडरपाण कपा शशोध -अरुण ककममार उपमाध्यमाय, भकवननेश्वर, ९४३७०३४१७२ arunupadhyay30@yahoo.in www.scribd.com/runupadhyay (सपारपारांश)-भमारत कक पमाण्डकललिलपययय मम दय बमातम मकख्य हह-(१) सयस्ककत वणर्णममालिमा दय पपरकमार कक हह-इन्दपर-मरुतप दमारमा ४९ अक्षर कक दनेवनमागरक तथमा बपरहमा दमारमा ६४ अक्षर कक बपरमाहक। पपरमाचकन बपरमाहक परम्परमा कक ललिलपयमाय तनेलिकगक और कन्नड़ हह। उत्तर भमारत कक सभक ललिलपयमाय दनेवनमागरक परम्परमा कक हह। इस कने अलतलरक्त पलश्चम भमाग मम खरयष्ठक ललिलप थक जय दमालहनने सने बमाययने ललिखक जमातक थक। इस परम्परमा कक अरबक और फमारसक हहै। बपरमाहक कक लिघक ललिलप तलमलि थक, जय कमालत्तर्णकनेय नने यकद मम अन्तमारमाष्टपरकय व्यवहमार कने ललियने बनमायक थक लजसमम पपरथम ४ स्परर्ण वणर कने एक हक लचह लदयने गयने। लवश्व कने ६ दरर्णनयय कक तरह ६ दरर्णवमाकप थक लजनमम सभक कमा भमारत मम लकसक न लकसक कमाम मम पपरययग हयतमा थमा। (२) ललिलप कने वणर्ण एक हयनने पर भक लवलभन्न कमालियय मम उनकने स्वरूप मम पलरवतर्णन हकए-बकहस्पलत, इन्दपर, ऋषभ दनेव, रशौनक, लवकपरममालदत्य, समायण भमाष्य कमालि, तथमा लबपरलटर रमासन मम मकदपरण कने ललियने। वनेद पकरमाण मम पमाश्चमात्य अनककरण दमारमा भनेद खयज कर उसने नष्ट करनने मम लिगने हकयने हह। भमारतकय परम्परमा समन्वय कक हहै। सकलष्ट आकमार सने हकयक पर वस्तकओय कमा नमामकरण भशौलतक जगतप सने हकआ। इनकने अथर्ण कमा लवस्तमार आलधिदहैलवक (आकमार) तथमा आध्यमालत्मक (ररकर कने भकतर) अथर्ण कमा लवस्तमार हकआ। वमास्तलवक सयसमार और रब्दयय कमा सम्बन्धि पपणर्ण नहकय हहै। रब्दयय कने अथर्ण सयस्थमाओय कने अनकसमार बदलितने हह। सयस्थमाओय कने ७ वगर्ण लकयने गयने हह। आलधिदहैलवक तथमा आध्यमालत्मक कने अलतलरक्त आलधिभशौलतक मम ५ वगर्ण हह-भशौगयललिक, ऐलतहमालसक कमारण, लवजमान कने लवषय, ललिलप और भमाषमा भनेद। ७ सयस्थमाओय कने अलतलरक्त रब्दयय कने ४ सपरयत यमास्क नने कहमा हहै-नमाम, आख्यमात (वहैजमालनक पलरभमाषमा), उपसगर्ण, लनपमात (पपरचलिन)। लकसक भक रब्द कमा पपरसयग कने अनकसमार अलिग अथर्ण हयगमा। अलिग अलिग अथर मम सममान गकण खयजनने पर उसकक पलरभमाषमा लमलिनेगक। यमा गकतमा उपलनषदप आलद कने सयलक्षप्त वमाक्ययय मम हर रब्द कक पलरभमाषमा बमाकक रब्द हयतने हह। ************** १. ललिलप कक उत्पलत - (१) सकलष्ट और रब्द वनेद-वमास्तलवक जगतप पकरुष वनेद हहै और उसकमा रब्द रूप स्तपरक यमा रपरकवनेद हहै। दने बपरहणक वनेलदतव्यने रब्दबपरह परय च यतप । रमाब्दने बपरहलण लनष्णमातत परयबपरहमालधिगच्छलत ॥ (महैतपरमायणक उपलनषदप ६/२२) रब्दमालत्मकमाय सकलवमलिरयर्णजकषमाय लनधिमानमकद्गकथ रम्य पदपमाठवतमाय च समाम्नमामप । दनेवक तपरयक भगवतक भवभमावनमाय वमातमार्ण च सवर्ण जगतमाय परममालतर्णहन्तपरक ॥ (दकगमार्ण सप्तरतक ४/१०) अनमालदलनधिनय बपरह रब्दतत्त्वय लनरञ्जनमप। लववत्तर्णतनेऽथर्णभमावनेन पपरलकपरयमा जगतय यतत॥ (वमाक्यपदकय, बपरहकमाण्ड, १) (२) अव्यक्त कमा व्यक्त रूप-जगतप कमा लजतनमा अलधिक सटकक वणर्णन रब्दयय मम हयगमा, समालहत्य उतनमा हक रमाश्वत हयगमा। ईरमावमास्ययपलनषदप-सपयर्णगमातप रककपरमप अकमायमप अवपरणमप अस्नमालवरमप रकदमप अपमापलवदमप कलवत मनकषक पलरभपत स्वयम्भपत यमाथमा-तथ्यतय अथमार्णनप व्यदधिमातप रमाश्वतकभ्यत सममाभ्यत। = अव्यक्त लवश्व कय रब्दयय मम ज्ययय कमा त्ययय व्यक्त करनने सने वह रमाश्वत हयतमा हहै। वमाल्मकलक रमाममायण - बमालि कमाण्ड-सगर्ण-२-ममा लनषमाद पपरलतष्ठमाय त्वमप अगमत रमाश्वतकय सममात | यतप कपरशौञ्च-लमथकनमादप एकय अवधिकत कमाम-मयलहतमप || १४|| ममा लनषमाद = लिक्ष्मक लनवमास लवष्णक, कपरशौञ्च लमथकन = रमावण-मन्दयदरक, उसमम एक रमावण कमाम मयलहत थमा लजसकने कमारण उसकमा वधि हकआ। इसक घटनमा कय व्यमापक रूप मम पपरलतलष्ठत करनने सने यह रमाश्वत हकआ। तमात्कमाललिक घटनमा कमा वणर्णन वमाक्य हहै; उसने स्थमायक करनमा कमाव्य हहै। सयसमार कक हर घटनमा कने ललियने ठकक ठकक रब्द लमलिनमा असम्भव हहै। अतत उसने कई लनकटवतर्ती रब्दयय सने घनेर कर व्यक्त करतने हह। वमाकप और अथर्ण कक पपरलतपलत्त तकन पपरकमार कक हहै-गणनेर यमा पपरत्यक्ष बपरह (अलिग अलिग रब्द, अक्षर), सरस्वतक (अव्यक्त भमाव) तथमा दयनयय कमा समन्वय सकबपरह (गयपथ बपरमाहण पपवर्ण १/१) वणमार्णनमामथर्ण सयघमानमाय रसमानमाय छन्दसमामलप। मङ्गलिमानमाय च कतमार्णरशौ वन्दने वमाणक लवनमायकशौ॥ (रमामचलरतममानस, मयगलिमाचरण) वमागप वहै बपरह च सकबपरह चनेलत। (ऐतरनेय बपरमाहण ६/३), वमागनेव सरस्वतक। (रतपथ बपरमाहण ७/५/१/३१, ऐतरनेय बपरमाहण ३/१) वमागप वहै पथ्यमास्वलस्तत। (कशौषकतलक बपरमाहण ७/६, रतपथ बपरमाहण ३/२/३/८, ४/५/१/४) (३) बपरहमा दमारमा आरम्भ- अव्यक्त वमाकप कमा यह गणनमात्मक रूप हहै अतत ललिलप कने पपरणनेतमा कय गणपलत कहमा गयमा। गणमानमाय त्वमा गणपलतय हवमामहने कलवय कवकनमामकपमरपरवस्तमप। ज्यनेष्ठरमाजय बपरहणमा बपरहणस्पत आ नत रकण्वन्नकलतलभत सकद समादनमप॥१॥ लवश्वनेभ्यय लहत्वमा भकवननेभ्यस्पलर त्वष्टमाजनतप समाम्नत कलवत। स ऋणयमा (-) लचदप-ॠणयमा (लवन्दक लचहनेन) बपरहणस्पलतदपरुर्णहय हन्तमह ऋत- (Right, writing, सत्य कमा लवस्तमार ऋत)स्य धितर्णलर।१७॥ (ऋकप २/२३/१,१७) = बपरहमा नने सवर्ण-पपरथम गणपलत कय कलवययय मम रपरनेष्ठ कलव कने रूप मम अलधिककत लकयमा अतत उनकय ज्यनेष्ठरमाज तथमा बपरहणस्पलत कहमा। उन्हययनने रपरव्य वमाकप कय ऋत (लवन्दकरूप सत्य कमा लवस्तमार) कने रूप मम स्थमालपत लकयमा। रपरव्य वमाक्य लिकप्त हयतमा हहै, ललिखमा हकआ बनमा रहतमा हहै (सदन = घर, सकद = बहैठनमा, सकद-समादनमप = घर मम बहैठमानमा)। पपरने लवश्व कमा लनरकक्षण कर (लहत्वमा) त्वष्टमा नने समाम (गमान, मलहममा = वमाकप कमा भमाव) कने

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कलव कय जन्म लदयमा। उन्हययनने ऋण लचह (-) तथमा उसकने लचदप-भमाग लवन्दक दमारमा पपणर्ण वमाकप कय (लजसने लहत्वमा = अध्ययन कर समाम बनमा थमा) ऋत (लिनेखन ) कने रूप मम धिमारण (स्थमायक) लकयमा। आज भक चकन कक ई-लचयग ललिलप मम रनेखमा तथमा लवन्दक दमारमा हक अक्षर ललिखने जमातने हह। इनकने ३ जयड़यय सने ६४ अक्षर (२६ = ६४) बनतने हह जय बपरमाहक ललिलप कने वणर कक सयख्यमा हहै। टनेलिकगपरमाम कने मयसर्ण कयड मम भक ऐसने हक लचह हयतने थने। दनेवलिक्ष्मय वहै त्र्यमाललिलखतमा तमामकत्तर लिक्ष्ममाण दनेवमा उपमादधित (तहैलत्तरकय सयलहतमा,५/२/८/३) बपरहमा नने लिनेखन कमा आरम्भ इसललियने लकयमा लक लियग मशौलखक बमात ६ ममास मम भपलि जमातने हह। नमाकलरष्यदप यलद बपरहमा ललिलखतमप चक्षकरुत्तममप। ततपरनेयमस्य लियकस्य नमाभलवष्यतप रकभमा गलतत॥ (नमारद स्मकलत) षण्ममालसकने तक समयने भपरमालन्तत सञ्जमायतने यतत। धिमातपरमाक्षरमालण सकष्टमालन पतपरमारूढ़मानप यतत परमाय॥ (बकहस्पलत-आलहक तत्त्व) (४) बकहस्पलत कने रब्द लचह-बपरहमा दमारमा अलधिककत बकहस्पलत नने पपरलतपद कने ललियने अलिग लचह बनमायने थने तथमा इसने परम्परमा कपरम सने इन्दपर कय पढ़मायमा। सवर्वेषमाय तक स नमाममालन कममार्णलण च पकथकप पकथकप। वनेद रब्दनेभ्य एवमादशौ पकथकप सयस्थमाश्च लनमर्णमने॥ (मनकस्मकलत १/२१) ऋष्यस्तपसमा वनेदमानध्यहैषन्त लदवमालनरमप। अनमालदलनधिनमा लवदमा वमागकत्सकष्टमा स्वयम्भकवमा॥ नमानमा रूपय च भपतमानमाय कमर्णणमाय च पपरवतर्णनमप। वनेद रब्दनेभ्य एवमादशौ लनलमर्णमकतने स ईश्वरत॥ (महमाभमारत रमालन्त पवर्ण २३२/२४-२६) बकहस्पतने पपरथमय वमाचय अगपरय यतप पपरहैरतप नमामधिनेयय दधिमानमात। पपरलतरब्द कने अध्ययन कय रब्द-पमारमायण कहतने थने। पपरने जकवन पढ़नने पर भक सने समझनमा सम्भव नहकय थमा, अतत रककपर (उरनमा) नने इसने ममारणमान्तक व्यमालधि कहमा। बकहस्पलतलरन्दपरमाय लदव्यवषर्णसहसपरय पपरलतपदयक्तमानमाय रब्दपमारमायणय पपरयवमाच। (पतञ्जललि-व्यमाकरण महमाभमाष्य १/१/१) तथमा च बकहस्पलतत-पपरलतपदय अरक्यत्वमातप लिक्षणस्यमालप अव्यवलस्थतत्वमातप ततपरमालप ततपरमालप स्खललित दरर्णनमातप अनवस्थमा पपरसयगमाच्च मरणमान्तय व्यमालधित व्यमाकरणलमलत औरनसमा इलत। (न्यमाय मञ्जरक) (५) इन्दपर-वमायक कमा व्यमाकरण-इसमम सकधिमार कने ललियने इन्दपर नने ध्वलन-लवजमान कने आचमायर्ण मरुतप कक सहमायतमा सने रब्दयय कय अक्षरयय और वणर मम बमायटमा तथमा वणयर्ण कय उच्चमारण स्थमान कने आधिमार पर वगर्तीककत लकयमा। वमागप वहै परमाचक अव्यमाककतमा अवदतप। तने दनेवमा इन्दपरय अबपरुवनप-इममाय नय वमाचय व्यमाककरुत-इलत। ... तमाय इन्दपरय मध्यत अपकपरम्य व्यमाकरयतप। तस्ममालददय व्यमाककतमा वमागप उदतने इलत। (तहैलत्तरकय सयलहतमा ६/४/७) समायण भमाष्य-तमामखण्डमाय वमाचय मध्यने लवलच्छद पपरककलत-पपरत्यय लवभमागय सवर्णतपरमाकरयतप। स (इन्दपरय) वमाचहैव व्यवतर्णयदप (महैतपरमायणक सयलहतप ४/५/८) इसमम क सने ह तक ३३ व्यञ्जन सशौरमण्डलि कने ३३ भमागयय कने पपरमाण रूप ३३ दनेवयय कने लचह हह। १६ स्वर लमलिमानने पर ४९ वणर्ण ४९ मरुतयय कने लचह हह जय पपरक आकमारगयगमा कने क्षनेतपर हह। लचह रूप मम दनेवयय कमा नगर हयनने कने कमारण इसने दनेवनमागरक कहमा गयमा। इन्दपर पपवर्ण कने तथमा मरुत उत्तर-पलश्चम कने लियकपमालि थने। आज भक पपवर्ती भमारत सने पलश्चमयत्तर सकममा तक दनेवनमागरक पपरचललित हहै (वणर कने रूपममातपर अलिग हह)। (६) ममाहनेश्वर सने पमालणलन-वणर कने सयकनेत सने सपतपर महनेश्वर नने बनमायने लजनसने कपरमरत व्यमाकरण परम्परमा चलिक-यनेनमाक्षर सममाम्नमायय अलधिगम्य महनेश्वरमातप। ककत्स्नय व्यमाकरणय पपरयक्तय तस्महै पमालणनयने नमपत। (पमालणनकय लरक्षमा, अलन्तम श्लियक) समकदपरवतप व्यमाकरणने महनेश्वरने ततयऽम्बक ककम्भयदरणय बकहस्पतशौ। तदप भमाग भमागमाच्च रतय पकरन्दरने ककरमागपर लवन्दपत्पलततय लह पमालणनशौ। (समारस्वत भमाष्य) बपरहमा बकहस्पतयने पपरयवमाच, बकहस्पलतलरन्दपरमाय, इन्दपरय भरदमाजमाय, भरदमाज ऋलषभ्यत, ऋषयय बपरमाहणनेभ्यत। (ऋकप तन्तपर) २. ललिलप कमा वगर्तीकरण-आकमार कने ७ लियकयय मम मपलि सत्य लियक अव्यक्त हहै, बमाकक व्यक्त हह। अतत उनकने अनकसमार ६ दरर्णन तथमा ६ दरर्ण-वमाकप यमा ललिलप हयतक हहै। समाकञ्जमानमाय सप्तथममाहकरनेकजय षलडदममा ऋषयय दनेवजमा इलत। तनेषमालमष्टमालन लवलहतमालन धिमामरत स्थमातपरने रनेजन्तने लवककतमालन रूपरत॥ (ऋकप १/१६४/१५, अथवर्ण ९/९/१२, तहैलत्तरकय बपरमाहण १/३/१) अलचलकत्वमानप लचलकतकषलश्चदतपर कवकनप पकच्छमालम लवद्मनने न लवदमानप। लवयस्तस्तम्भ षलडममा रजमायलस अजस्य रूपय लकमलप लस्वदनेकमप। (ऋकप १/१६४/६, अथवर्ण ९/९/७) रपरक रूप मम लवश्व कने १० आयमाम हह लजनकय दरमा, लदरमा, दर महमालवदमा आलद कहमा गयमा हहै। इनमम ५ आयमाम लवश्व कमा यमालन्तपरक वणर्णन करतने हह। भशौलतक लवजमान मम ५ मपलि इकमाइययय दमारमा सभक ममाप हय सकतक हहै। इसकने अनकरूप ५ ’ममा’ (ममा ममानने, ममाप मम) छन्द हह। इस लवश्व कक व्यमाख्यमा समायख्य दरर्णन सने हयतक हहै, लजसमम ५ x ५ = २५ तत्त्व हह। इसकने अनकरूप गमायतपरक ललिलप हयगक लजसमम २५ वणर्ण यमा एक अलधिक २६ तक हय सकतने हह। इसकने बमाद चनेतनमा कने ५ स्तर हह इसकने अनकसमार ५ और ललिलप हययगक। चनेतनमा वह हहै जय लचलत (रूप यमा कपरम) कर सकने। सबसने बड़क रचनमा नगर भक लचलत (City) हहै। षष्ठ आयमाम पकरुष हहै-एक पकर कक रचनमा। सप्तम ऋलष (रस्सक) हहै जय लवलभन्न लवन्दकओय लपण्डयय कने बकच सम्बन्धि हहै।

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यमास्क कने अनकसमार बपरह और समाममान्य मनकष्य कने बकच ऋलष दमारमा सम्बन्धि हयतमा हहै। अष्ट आयमाम नमाग यमा वकतपर हहै जय लपण्डयय कय सकममा मम बमान्धितमा हहै। नवम आयमाम रन्धिपर (कमक, कम घनत्व आलद) हहै लजसकने कमारण नयमा लनममार्णण हयतमा हहै (नव = ९ यमा नयमा)। दरम आयमाम रस हहै लजसने पमानने सने आनन्द हयतमा हहै। यह सकलष्ट कमा मपलि समरूप तत्त्व हहै जय सबमम सममालहत हहै। चनेतन कतमार्ण रूप लवष्णक-हयतमा भयक्तमा हलवमर्णन्तपरय यजय लवष्णकत पपरजमापलतत। सवर्वं कलश्चतप पपरभकत समाक्षक ययऽमकलष्मनप भमालत मण्डलिने॥ (महैतपरमायणक आरण्यक ६/१६) ७ ऋलष पपरमाण हहै जय रपरम और तप सने खकयचतने हह-पपरमाणमा वमा ऋषयत.... तने यतप पकरमास्ममातप सवर्णस्ममानप इदलमच्छन्तत रपरमनेण तपसमा अलरषनप तस्ममातप ऋषयत। (रतपथ बपरमाहण ६/१/१/१) सप्तपपरमाणमात पपरभवलन्त तस्ममातप सप्तमालचर्णषत सलमधित सप्त हयममात। (मकण्डक उपलनषदप २/१८) वकतपर दमारमा वकत्त मम सकलमत करनमा-वकतपरय ह वमा इदय सवर्वं वकत्वमा लरष्यने... तस्ममादप वकतपरय नमाम (रतपथ बपरमाहण ६/१/१/१) नव सने नवकन-नवय नवय भवलत जमायममानत अहमा कनेतकरूपय ममामनेत्यगपरमप। (ऋकप १०/८५/१९) रस रूप सने सकलष्ट-यदप वहै ततप सकककतय रसय वहै सत। रसय लिब्ध्वमाऽऽनन्दक भवलत। (तहैलत्तरकय उपलनषदप २/७/२) पपरलतष्ठमा दरममहत। (कशौषकतलक बपरमाहण उपलनषदप २६/२) आकमार यमा मलस्तष्क गकहमा मम वमाकप कने ३ पमाद हह लजनकय गशौरक (ग = तकतकय व्यञ्जन) कहमा हहै। चतकथर्ण पद बमाहर लनकलिनने पर अजमान यमा भमाषमा कक सकममा कने कमारण ककछ लिकप्त हय जमातमा हहै, अतत यह तम हहै। गशौ और तम कमा सम्बन्धि गशौतम दरर्णन हहै। चत्वमालर वमाकप पलरलमतमा पदमालन तमालन लवदकबपरमार्णहणमा यने मनकलषणत। गकहमा तपरकलण लनलहतमा ननेङ्गयलन्त तकरकयमा वमाचय मनकष्यमा वदलन्त॥ (ऋकप १/१६४/४५) गशौरक वमाकप कमा वणर मम लवभमाजन कई पपरकमार सने हयतमा हहै लजसकने कमारण ६ ललिलप हह-गशौरकलमर्णममाय सललिलिमालन तक्षलत एकपदक लदपदक समा चतकष्पदक। अष्टमापदक नवपदक समा बभपवकषक सहसपरमाक्षरमा परमने व्ययमनप॥ (ऋकप १/१६४/४१, अथवर्ण ९/१०/२१, १३/१/४१, तहैलत्तरकय बपरमाहण २/४/६/११) १ पद (भमाग) = पपणर्ण वमाकप। २ पद = स्वर + व्यञ्जन ४ पद = बपरह यमा वमाकप कने ४ पद। ध्वलनवर्णणमार्णत पदय वमाक्यय इत्यमास्पद चतकष्टयमप। यस्यमात सपक्ष्ममालद भनेदनेन वमारदनेवकय तमकपमास्महने॥ (सरस्वतक कण्ठमाभरण १/१, स्कन्द पकरमाण ममाहनेश्वर खण्ड, कशौममालरकमा खण्ड ४०/६५)) ८ पद = १ अक्षर मम अलधिकतम ८ वणर्ण। ९ पद = १ अक्षर मम ९ पपरमाण-लवन्दक (मध्य कने स्वर मम २ लवन्दक) वमाचमष्टमापदकमहय नवसपरलक्तमकतस्पकरमप। इन्दपरमातप पलर तन्वय ममने॥ (ऋकप ८/७६/१२) इनकने अनकसमार ६ ललिलपयमाय हह-गमायतपरक वमाकप-समायख्य दरर्णन कने ५ x ५ = २५ तत्त्व (१+४)२। समायख्य ललिलप २५ वणर्ण (फपरनेञ्च), रयमन मम अलधिक वणर्ण एक्स ()। अवकहडमा चकपर मम २० व्यञ्जन तथमा ५ स्वर अ, इ, उ, ए, ओ (रयमन कने a, e, I, o, u )। बकहतक वमाकप-रहैव दरर्णन मम ६ x ६ = ३६ तत्त्व (२+४)२। अवकहडमा मम ४ स्थमानयय पर ३-३ वणर्ण अलधिक (३७ अक्षर) अदकश्य वमाकप कमा दकश्य रूप मम ललिलप लचह भक एक ललिङ्ग हहै, ललियग = लिकनय गमयलत (यलस्मनप लचह रूपने)। ललियग सने ललियगकआ (Lingua) यमा लिहगकएज (language) हकआ हहै। मपलि स्वरूप ललिङ्गत्वमान्मपलिमन्तपर इलत स्मकतत । सपक्ष्मत्वमात्कमारणत्वमाच्च लियनमादप गमनमादलप । लिक्षणमात्परमनेरस्य ललिङ्गलमत्यलभधिकयतने ॥ (ययगलरखयपलनषदप, २/९, १०) लवलभन्न कमामयय कने ललियने अलिग अलिग पपरकमार कने ललियग यमा ललिलप हह-रकद स्फलटक सयकमारय रकभमाष्टलस्तपरयरदमाक्षरमप । मनेधिमाकरमभपदप भपयत सवर्णधिममार्णथर्ण समाधिकमप ॥८३॥ गमायतपरक पपरभवय मन्तपरय हलरतय वश्यकमारकमप । चतकलवर्वंरलत वणमार्णढ्यय चतकष्कलिमनकत्तममप ॥८४॥ अथवर्णमलसतय मन्तपरय कलिमाष्टक सममायकतमप । अलभचमालरकमत्यथर्वं तपरयलस्तपरयरच्छकभमाक्षरमप॥८५॥ यजकवर्वेद सममायकक्तमप पञ्चलतपरयरच्छकभमाक्षरमप । कलिमाष्टक सममायकक्तमप सकश्वनेतय रमालन्तकय तथमा॥८६॥ तपरययदर कलिमायकक्तमप बमालिमादहैत सह लियलहतमप । समामयद्भवय जगत्यमादय बकलदसयहमार कमारकमप ॥८७॥ वणमार्णत षडलधिकमात षलष्टरस्य मन्तपरवरस्य तक । पञ्च मन्तपरमास्तथमा लिब्ध्वमा जजमाप भगवमानप हलरत ॥८८॥ (ललिङ्ग पकरमाण १/१७) धिमर्ण अथर्ण समाधिन कने ललियने ३८ वणर्ण कक ललिलप (मय ललिलप अवकहडमा कने ३७ अक्षर + ॐ) गमायतपरक कने २४ अक्षर पपरभमाव और ख्यमालत कने ललियने। ककष्ण अथवर्ण (घयरमालङ्गरस) कने ३३ अक्षर -अलभचमार लवनमार कने ललियने। यजकवर्वेद कने ३५ अक्षर (गकरुमकखक) -यज तथमा रमालन्त कने ललियने।

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समाम कने ६६ अक्षर सयगकत कने ललियने। ४९ मरुतप (७ x ७) कने अनकसमार ४९ अक्षर कक दनेवनमागरक (१+२+४)२। ३३ व्यञ्जन वणर्ण सशौरमण्डलि कने ३३ धिमाम कने ३३ दनेवयय कने लचह हह। ४९ मरुतप बपरहमाण्ड कने ४९ क्षनेतपर हह। क्ष, तपर, ज-३ अक्षर लमलिमानने पर ५२ क्षनेतपर बपरहमाण्ड कमा आधिमार कपमर्ण यमा लनममार्णण क्षनेतपर गयलियक हहै। यह ५२ रलक्तपकठयय कने पपरतकक हह। ६४ (८ x ८) कलिमा कने अनकसमार ६३ यमा ६४ अक्षर कक बपरमाहक ललिलप। दकश्य जगतप (तपत लियक) कमा लवस्तमार पकथ्वक व्यमास कमा २६४ गकणमा हहै। वनेद कक लवजमानप वमाकप ८ और ९ कमा समन्वय रूप मम (८ +९)२ = २८९ हह। इसमम ३६ x ३ = १०८ स्वर, ३६ x ५ = १८० व्यञ्जन तथमा एक ॐ हहै। १ अक्षर मम पपरमाण कने ९ लवन्दक यमा ८ वणर्ण तक हय सकतने हह। यने बकहतक यमा अनकष्टकपप कने १ पमाद कने अक्षर हह। ४ पमाद लमलिमानने पर ४ x ८ x ९ = २८८ अक्षर हययगने। अन्य पपरकमार सने पपरमाण रूप मम वमाकप बकहतक (३६ अक्षर) हहै। ध्वलन उत्पन्न करनने कने ललियने ८ स्थमान हह, ३ स्वर कने तथमा ५ व्यञ्जन कने। अतत ३६ x ३ स्वर और ३६ x ५ व्यञ्जन हह। वमागप वहै बकहतक तस्यमा एष पलतस्तस्ममादप बकहस्पलतत (रतपथ बपरमाहण १४/४/१/२२, बकहदमारण्यक उपलनषदप (१/३/२०) षटप लतपरयरदक्षरमा बकहतक (रतपथ बपरमाहण ८/३/३/८, तहैलत्तरकय बपरमाहण ३/९/१२/१, तमाण्ड्य महमाबपरमाहण १०/३/९, गयपथ बपरमाहण पपवर्ण ४/१२, ऐतरनेय बपरमाहण ४/२४, ७/१) अष्टशौ स्थमानमालन वणमार्णनमामकरत कण्ठत लररस्तथमा। लजहमामपलिय च दन्तमाश्च नमालसकयष्ठशौ च तमालिक च॥ (पमालणनकय लरक्षमा) सहसपरमाक्षरमा वमाकप-सहसपरमाक्षरमा परमने व्ययमनप, अथमार्णतप यह व्ययम (लतपरलवष्टपप = लतब्बत) कने परने चकन, जमापमान मम हहै। आकमार यमा ररकर कने भकतर इसकने अन्य अथर्ण हह। १५००० अक्षर तक हय सकतने हह-सहसपरधिमा पञ्चदरमालन उक्थमा यमावदप दमावमापकलथवक तमावलदतप ततप। हह-सहसपरधिमा मलहममानत सहसपरय यमावदप बपरह लवलष्ठतय तमावतक वमाकप॥ (ऋकप १०/११४/८, ऐतरनेय आरण्यक २/३/७) ३. ललिलप तथमा भमाषमा-वमाकप अनकष्टकपप (पपरलत पमाद ८ अक्षर) हयनने कने कमारण ८ = ६४ पपरकमार कक ललिलपयमाय थकय (बशौद गपरन्थ लिललित लवस्तर)। ९ पपरमाण लवन्दक कने आधिमार पर जहैन सपतपरयय मम १८ ललिलप (९ आकमार तथमा ९ पकथ्वक पर) हह। इसक पपरकमार ध्वलन कने ९ पपरमाण लवन्दक कने कमारण ९ व्यमाकरण थने लजनमम हनकममानप कय लनष्णमात बतमायमा गयमा हहै-सवमार्णसक लवदमासक तपयलवधिमानने, पपरस्पधिर्णतनेयय लह गकरुय सकरमाणमामप। सयऽयय नव-व्यमाकरणमाथर्ण-वनेत्तमा, बपरहमा भलवष्यलत तने पपरसमादमातप॥ (वमाल्मकलक रमाममायण, उत्तरकमाण्ड, ३६/४६) ललिलपययय कमा पकन लनर्णधिमार्णरण कई बमार हकआ हहै-(१) बपरहमा पपवर्ण समाध्य यकग (३१००० ई.पप. सने पहलिने)-यतपर पपवर्वे समाध्यमात सलन्त दनेवमात (पकरुष सपक्त,१६) (२) स्वमायम्भकव मनक (२९००० ई.पप.- बपरहमाण्ड पकरमाण कने अनकसमार) (३) कश्यप कमालि (१७५०० ई.पप.) (४) कमालत्तर्णकनेय-अपमान्तरतममा बपरहमा (१५८०० ई.पप.-महमाभमारत वन पवर्ण २३०/८-१०)-ममाहनेश्वर व्यमाकरण, तलमलि ललिलप। (५) वहैवस्वत मनक (१३९०२ ई.पप.) (६) ऋषभ दनेव (९५०० ई.पप., १०००० ई.पप. कने जलि पपरलिय कने बमाद)-जहैन परम्परमा कने अनकसमार बपरमाहक ललिलप। ऋरवनेद (१०/१६६, ३/१३, १४, ९/७१) (७) इक्ष्वमाकक सने सपयर्णवयर कमा पकनत आरम्भ (८) भरदमाज (मकण्डकयपलनषदप १/१/१-५, चरक सयलहतमा पपरथम अध्यमाय मम ऋलष सलमलत) ६३०० ई.पप-१९वम व्यमास। (९) वनेदव्यमास (३२०० ई.पप.)-अलन्तम व्यमास। (१०) रशौनक महमारमालिमा (३१००-२८००) पकरमाण और वनेदरमाखमायम। इसकनेपपवर्ण ककष्ण यजकवर्वेद कक रमाखमायम पपरने लवश्व मम थक। रशौनक कने बमाद यह भमारत मम सकलमत रह गयमा। (११) महमापद्मनन्द (१६३४-१५४६ ई.पप.) नने सभक ममान दनेर कने ललियने लनधिमार्णलरत लकयने। (१२) उज्जहैन कने सम्वतप पपरवतर्णक परममार रमाजमा लवकपरममालदत्य-बनेतमालि भट्ट कक अध्यक्षतमा मम लवरमालिमा नमामक नगरयय मम पकनत पकरमाण सम्पमादन-भलवष्य पकरमाण, पपरलतसगर्ण पवर्ण ४, अध्यमाय १- एवय दमापरसन्ध्यमायमा अन्तने सपतनेन वलणर्णतमप। सपयर्णचन्दपरमान्वयमाख्यमानय तन्मयमा कलथतमप तव॥१॥ लवरमालिमायमाय पकनगर्णत्वमा वहैतमालिनेन लवलनलमर्णतमप। कथलयष्यलत सपतस्तलमलतहमाससमकच्चयमप॥२॥ (१३) समायण भमाष्य (१४०० ई.)- इसमम पपरयकक्त दनेवनमागरक ललिलप कमा हक पपरने भमारत मम पपरचमार हकआ। (१४) लबपरलटर कमालि (१८०० ई.)- अलिग अलिग क्षनेतपरयय कने ललियने लभन्न पपरकमार कने टमाईप। ४. वहैलदक रयधि कने पपरकमार-(१) अपशौरुषनेयतमा-वनेद ३ पपरकमार सने अपशौरुषनेय हह-(क) व्यलक्तगत पक्षपमात यमा भपलि नहकय हहै। सममालधि अवस्थमा मम ऋलषययय कय बपरह अथमार्णतप लवश्व सने पपरनेरणमा रूप मम लमलिमा जमान हहै-अजमानप ह वहै पकश्नकनप तपस्यममानमानप बपरह स्वयम्भप अभ्यमानषर्णतप । तदकषययऽभवनप । त एवय बपरह यजमपश्यनप । (तहैलत्तरकय आरण्यक, २/९/१) = अजपकलश्न तपस्यमा दमारमा ऋलष बनने। उनकय बपरह और यज स्वरूप कमा समाक्षमातप हकआ। यमामकषयय मन्तपरककतय मनकलषण अन्वहैच्छनप दनेवमास्तपसमा रपरमनेण । तमाय दहैवक वमाचय हलवषमा यजमामहने समा नय दधिमातक सकककतस्य लियकने ॥ (तहैलत्तरकय

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बपरमाहण २/८/८/१४) = मन्तपरकतमार्ण मनकलषययय नने तप और रपरम सने दहैवक वमाकप पपरमाप्त कक। आप्तयपदनेरत रब्दत। (न्यमाय सपतपर १/१/७) = पपरबकद लियगयय कमा उपदनेर रब्द (वनेद) हहै। (ख) कई लवचमारयय कमा औसत- कई यकगयय तक लवलभन्न दनेरयय कने ऋलषययय कने जमान कमा सयकलिन हहै। इससने २ पपरकमार कमा अपशौरुषनेयत्व हयतमा हहै-सबकमा समारमायर लिनेनने सने व्यलक्तगत लवचमार दपर हयतने हह। लवजमान सम्मत सयस्ककत भमाषमा हक सब दनेरयय कने ललियने सममातन हय सकतक हहै। इसमम व्यक्त लवचमार भक कई अथर मम एक समाथ लवजमानसम्मत हययगने। (ग) अतकलन्दपरय जमान- समाममान्य जमान ५ जमाननेलन्दपरययय सने ५ पपरमाणयय दमारमा गपरहण हयतमा हहै। लकन्तक २ पपरकमार कने असतप पपरमाण भक हह, लजनकने दमारमा अतकलन्दपरय जमान हयतमा हहै। अतत समाममान्यतत ५ पपरमाण कहने गयने हह लकन्तक असतप (अनकभव सने परने) पपरमाणयय कय लमलिमानने पर ७ हयतने हह। ऋलष और लपतर (परयरजमा = रजसप यमा लियकयय सने परने) २ असतप पपरमाण हह। इन दय पपरमाणयय सने जमान पमानने वमालिने २ पपरकमार कने ऋलष हह-जमान पपरवत्तर्णक यमा गयतपर पपरवत्तर्णक (लपतर)। असदप वमा इदमगपर आसकतप। तदमाहत-लकय तदप आसकतप इतप। ऋषयय वमाव तनेऽगपरनेऽसदमासकतप। तदमाहकत-कने तने ऋषय इलत। तने यतप पकरमाऽऽस्ममातप सवर्णस्ममालददलमच्छन्तत रपरमनेण तपसमालरषनप तस्ममादप ऋषयत। (रतपथ बपरमाहण ६/१/१/१) परयरजमा य एष तपलत (बकहदमारण्यक उपलनरदप ५/१४/३) सप्तपपरमाणमा पपरभवलन्त तस्ममातप (मकण्डक उपलनषदप २/१/८) पञ्चपपरमाणयलमर्वं पञ्चबकद्ध्यमालदमपलिमप (श्वनेतमाश्वतर उपलनषदप १/५) पपरमाण गपरहण करनने कने ललियने इनकय अलरन कक ७ लजहमा कहमा गयमा हहै। भमाव व्यक्त करनने कने ललियने भक ७ अलचर्ण (लिपट) हह। यने पपरजमा कक ७ पपरमान्त भपलम हह। गपरहण और छयड़नने कने ककलि १४ मन कक पपरवकलत्त हह, अतत मन कक १४ पपरवकलत्त भक अलरन-लजहमा कहक गयक हह। तस्य सप्तधिमा पपरमान्तभपलमत पपरजमा। (ययग सपतपर २/२७) अलरनलजहमा मनवत सपरचक्षसय लवश्वनेनय दनेवमा अवसमा गमलन्नह। (ऋरवनेद १/९८/७, यजकवर्वेद २५/२०) कमालिक करमालिक च मनयजवमा च सकलियलहतमा यमा च सकधिपमपरवणमार्ण। स्फकललिलङ्गनक लवश्वरुचक च दनेवक लिनेलिमायममानमा इलत सप्त लजहमात॥ (मकण्डकयपलनषदप १/२/४) दय अतकलन्दपरय पपरमाणयय सने गपरहण लकयमा जमान दहैवक वमाकप हहै-नमय ऋलषभ्यय मन्तपरककद्भ्यय मन्तपरलवद्भ्यय मन्तपरपलतभ्यय । ममा ममामकषयय मन्तपरककतय मन्तपरलवदत पपरमाहक (दक) दर्दैवक वमाचमकदमासमप ॥ (वरदमापपवर्णतमालपनक उपलनषदप, तहैलत्तरकय आरण्यक, ४/१/१, महैतपरमायणक सयलहतमा ४/९/२) अतत वहैलदक अथर्ण करनने मम ककछ अतकलन्दपरय जमान भक ममाननमा हयगमा। (२) तकन लवश्वयय कमा सम्बन्धि-आकमार सने हक पकथ्वक और उसमम मनकष्य कक सकलष्ट हकयक हहै। इनकमा अलिग अलस्तत्व इसललियने बनमा हकआ हहै लक इनकमा परस्पर पपरभमाव बहकत कम हहै और इसने वहैजमालनक पपरययग दमारमा नहकय जमान सकतने। इनकमा उल्लिनेख गकतमा अध्यमाय ८ कने आरम्भ मम हहै। आलधिदहैलवक आकमार कमा लवश्व हहै। उसकने भकतर इसकक दय पपरलतममा हकयक-आलधिभशौलतक- पकथ्वक पर कमा लवश्व। पकथ्वक पर पपरत्यनेक मनकष्य लवश्व कक पपरलतममा हहै-पकरुषयऽयय लियक सलम्मतत इत्यमाह भगवमानप पकनवर्णसकरमातपरनेयत। (चरक सयलहतमा, सपतपर स्थमान ५) अतत हर मन्तपर कने यने ३ पपरकमार कने अथर्ण सम्भव हह। यने सभक अथर्ण परस्पर सम्बलन्धित हह और अपनने अपनने लवश्वयय सने भक सम्बलन्धित। लकसक एक हक अथर्ण कय सत्य ममान कर अन्य कने लवरुद पपरचमार करनने सने जमान नष्ट हयतमा हहै। (३) वनेद कक वकलद-जय भक रमास्तपरयय मम ललिखमा हहै, उसकमा ठकक उलिटमा वनेदयय कय नष्ट करनने कने ललियने पढ़मायमा जमातमा हहै। इन्दपर पपवर्ण लदरमा कने लियकपमालि थने, पर उनकय उन आयर कमा मकख्य ममानतने हह जय पलश्चम सने आयने थने। इसक पपरकमार दपरलवड सने वनेद कक उत्पलत्त कहक गयक हहै, पर उसने उत्तर भमारत कने आयर दमारमा दलक्षण भमारत पर बलिमातप थयपनमा कहतने हह। भमागवत पपरवचन मम लपछलिने ५००० वषयय सने उसकमा ममाहमात्म्य कह रहने हह लक भलक्त और उससने जमान वहैरमारय कमा जन्म दपरलवड़ मम हकआ और वकलद कणमार्णटक मम हकयक, लवस्तमार महमारमाष्टपर तक हकआ। रयज भमागवत सकननने और उसकक पपजमा करनने कने बमाद उसकमा उलिटमा पढ़ कर परकक्षमा पमास करतने हह। अहय भलक्तलरलत ख्यमातमा इमशौ मने तनयशौ मतशौ। जमान वहैरमारय नमाममानशौ कमालिययगनेन जजर्णरशौ॥४५॥ उत्पन्नमा दपरलवडने समाहय वकलदय कणमार्णटकने गतमा। क्वलचतप क्वलचतप महमारमाष्टपरने गकजर्णरने जकणर्णतमायगतमा॥४८॥ ततपर घयर कलिनेययर्णगमातप पमाखण्डहैत खलण्डतमाङ्गकमा। दकबर्णलिमाहय लचरय जमातमा पकतपरमाभ्यमाय सह मन्दतमामप॥४९॥ वकन्दमावनय पकनत पपरमाप्य नवकननेव सकरूलपणक। जमातमाऽहय यकवतक सम्यकप रपरनेष्ठरूपमा तक समाम्पपरतमप॥५०॥ (पद्म पकरमाण उत्तर खण्ड रपरकमदप भमागवत ममाहमात्म्य, भलक्त-नमारद सममागम नमाम पपरथमयऽध्यमायत) भलक्त यमा रपरदमा सने जमान हयतमा हहै, जमान कमा आधिमार वनेद हहै-स बपरहलवदमा सवर्णलवदमा पपरलतष्ठमा (मकण्डक उपलनषदप १/१/१)। आकमार मम अपप सने सकलष्ट हकयक। पकथ्वक पर भक जहमाय सने वनेद कमा आरम्भ हकआ उसने दपरलवड़ कहतने हह (दपरव सने उत्पन्न करनने वमालिमा, पमानक कक तरह बहनने वमालिमा भक दपरलवड़ = धिन हहै)। यह इलन्दपरययय दमारमा गपरहण लकयमा जमान हहै, मपलि सपरयत आकमार कमा गकण रब्द हहै, लजसकमा सकन कर गपरहण हयतमा हहै, अतत वनेद कय रपरुलत कहतने हह। रपरुलत कमा गपरहण कणर्ण सने हयतमा हहै। अतत वनेद कमा जहमाय लवकमास हकआ, वह कणमार्णटक (कणर्ण कमा वन) हहै। यहमाय वकलद कमा अथर्ण हहै, रब्दमाथर्ण कमा लवस्तमार। सकलष्ट आकमार मम रकरु हकयक, पर रब्द कमा नमाम रूप मम आरम्भ पकथ्वक पर हकआ। पमालथर्णव रब्दयय कमा आलधिदहैलवक और आध्यमालत्मक लवश्वयय मम अथर्ण लवस्तमार हक वनेद कक वकलद हहै। जहमाय तक लकसक कमा पपरभमाव हहै वह उसकमा महत यमा महत्व, मलहममा हहै। अतत वनेद कमा जहमाय तक पपरभमाव फहैलिमा वह महमारमाष्टपर हहै। नहकय तय वह रमाष्टपर और भमारत महमारमाष्टपर हयनमा चमालहयने थमा।

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(४) २ सम्पपरदमाय-वनेद कने दय पपरकमार कक व्यमाख्यमा हह। दनेव पक्ष इन्दपर अथमार्णतप लकपरयमात्मक लवलकरण उजमार्ण सने आरम्भ कर सकलष्ट लकपरयमा समझतने हह। यह सपयर्ण कनेलन्दपरत हहै जय दनेव स्वगर्ण हहै। असकर मपलि अपप सने सकलष्ट वणर्णन आरम्भ कर बमाकक लनममार्णण समझतने हह। अपप बपरहमाण्ड कमा फलिमा पदमाथर्ण हहै जय वरुण कमा समकदपर यमा असकर स्वगर्ण हहै। पपरथम पपरकमार अपप-कनेलन्दपरत थमा जय स्वमायम्भकव मनक कमालि मम आरम्ब हकआ। उनकय पपरथम मनकष्य बपरहमा कहतने थने अतत यह बपरह सम्पपरदमाय हकआ। बमाद मम लववस्वमानप (सपयर्ण, वहैवस्वत मनक कने लपतमा) दमारमा सपयर्ण कनेलन्दपरत अध्ययन हकआ जय आलदत्य सम्पपरदमाय हकआ। बमाद मम इसकमा यमाजवल्क्य नने पपरचमार लकयमा। ज्ययलतष मम भक महमाभमारत कमालि मम २ मत थने-स्वमायम्भकव मनक (लपतमामह बपरहमा) कने मत कय आयर्ण मत कहतने थने। आज भक लपतमामह कय आयर्ण (अजमा) कहतने हह। इसकमा पपरचमार करनने वमालिने कय भक आयर्णभट कहमा गयमा। न्य मत लववस्वमानप कमा थमा लजसकमा महमाभमारत कने समय परमारर दमारमा पपरचमार हकआ थमा-इसने लवष्णक पकरमाण मम महैतपरनेय (सपयर्ण जमातमा) कने उपदनेर सने परमारर नने ललिखमा हहै। आयर्णभट-महमालसदमान्त-परमाररमतमाध्यमाय (२) कललिसयजने यकगपमादने पमारमारयर्वं मतय पपररस्तमतत। वक्ष्यने तदहय तन्मम मततकल्यय मध्यममान्यतपर॥१॥ एतलत्सदमान्त दयमकषदमातने कलिशौ यकगने जमातमप। स्वस्थमानने दककप तकल्यमा अननेन खनेटमात स्फकटमात कमायमार्णत॥२॥ रपरक लवष्णकपकरमाण, पपरथम अयर, अध्यमाय १-ॐ परमाररय मकलनवरय ककत पशौवमार्णलहक लकपरयमामप। महैतपरनेयत पलरपपपरच्छ पपरलतपत्यमालभवमाद च॥१॥ यन्मयय च जगदप बपरहन्यतश्चहैतश्चरमाचरमप। लिकनममासकदथमा यतपर लियमनेतमालन यतपर च॥५॥ आयर्णभटकय, गयलिपमाद-सदसज्जमानसमकदपरमातप समकदकतय बपरहणत पपरसमादनेन। सज्जमानयत्तमरत्नय मयमा लनमरनय स्वमलतनमावमा॥४९॥ आयर्णभटकयय नमाम्नमा पपवर्वं स्वमायम्भकवय सदमा लनत्यमप। सकककतमायकषयत पपरणमारय ककरुतने पपरलतकञ्चककय ययऽस्य॥५०॥ आज भक वनेद कने पकरमानने रब्द दपरलवड़ भमाषमाओय मम हक हह (रय नय लवष्णक उरुकपरमत-दलक्षण मम हक नगर कय उरु कहतने हह)। ज्ययलतष मम भक पपरमाचकन लपतमामह मत कने अनकसमार गकरु वषर्ण दलक्षण मम हक हहै। इसकने अनकसमार दय पपरकमार कने अथर्ण हययगने-दय सम्पपरदमाययय कने अनकसमार अथर्ण व्यवस्थमा। स्थमानकय भमाषमाओय कने रब्दयय कने अनकसमार अथर्ण। ५. आगम-लनगम-पकरमाण कमा समन्वय-तकलिसकदमास नने रमामचलरतममानस कने मङ्गलिमाचरण मम ललिखमा हहै-नमानमा पकरमाण-लनगममागमसम्मतय यदप। पर आजकलि सभक कय एक-दपसरने कमा लवरयधिक ममानतने हह और ककछ सम्पपरदमाय तय वनेदयय कय भक उनकने बपरमाहण भमाग सने अलिग और लवरयधिक ममानतने हह। बपरहसपतपर मम भक आरम्भ कने चतकतसपतपरक मम कहमा हहै-(३) रमास्तपरययलनत्वमातप (४) तत्तक समन्वयमातप। समन्वय रयधि कने पपरकमार हह (१) पलरभमाषमा-लनरुक्त कने अनकसमार रब्दयय कने ४ सपरयत हह-नमाम, आख्यमात, उपसगर्ण, लनपमात (पपरचलिन)। आख्यमात कमा अथर्ण वणर्णन यमा पलरभमाषमा हहै। गकतमा, उपलनषदप तथमा वनेद कने भक सयलहतमा और मन्तपर भमागयय मम कई वमाक्य एक यमा अलधिक रब्दयय कक पलरभमाषमा दनेतने हह। उस वमाक्य मम लनलदर्णष्ट रब्द कय छयड़ कर बमाकक रब्द उसकक पलरभमाषमा हह। जहैसने-(१) तन्मने मनत लरवसङ्कल्पमस्तक (यजकवर्वेद ३४/१) मन क्यमा हहै, जय सङ्कल्प कमा स्थमान हहै। लरव क्यमा हहै, जय लवचमार सङ्कल्प (लनममार्णण) मम पलरणत हय। (२) सहयजमा पपरजमा सकष्ट्वमा पकरयवमाच पपरजमापलतत। अननेन पपरसलवध्यष्वमनेषवयऽलसवष्ट कमामधिककप॥ (गकतमा ३/१०)-यज क्यमा हहै-लजससने इष्ट वस्तक कमा लनममार्णण हय। इष्ट यमा उपययगक क्यमा हहै-लजससने यज तथमा उससने पपरजमा चलितक रहने। (२) सयगपरह दमारमा पलरभमाषमा-एक हक रब्द कने कई पपरसयगयय मम पपरययग कमा सयगपरह कर उनमम सममान अथर्ण खयजतने हह। जहैसने गय रब्द कने कई अथर मम पपरययग हह-लकरण, पकथ्वक, इलन्दपरय, यज, एक परक आलद। इनमम समन्वय अथर्ण हहै लक गय कने ३ गकण हह-स्थमान, लकपरयमा यमा गलत (अयगपरनेजक कमा गय = Go) उससने उत्पमादन (यह गकतमा कक यज पलरभमाषमा सने पपरनेलरत हहै) (३) आगम-लनगम-पकरमाण समन्वय-वनेद मन्तपरयय कने रब्दयय कमा अथर्ण मकख्यतत बपरमाहण भमाग मम और लवस्तकत वणर्णन पकरमाणयय मम लमलितमा हहै। जहैसने वनेदयय कक लियक व्यवस्थमा कमा वणर्णन कनेवलि पकरमाणयय मम हक हहै। (४) इलतहमास भपगयलि-इनकमा वणर्णन भक मकख्यतत पकरमाणयय और इलतहमास गपरन्थयय रमाममायण आलद मम हहै। बपरमाहण गपरन्थयय मम भक इलतहमास भमाग कमा अन्त ’ह आस’ रब्दयय सने हयतमा हहै। (५) ममाप कक इकमाई- पकरमाणयय मम लियकयय कक ममाप दक गयक हहै। यने कई पपरकमार कने ययजनयय मम लदयने गयने हह। ययजन ७ पपरकमार कने हह इसकमा लनदर्वेर भमागवत पकरमाण और अस्य वमामकय सपक्त (ऋकप १/१६४/२) मम हह। ३ पपरकमार कने ययजनयय आत्ममा, उत्सनेधि और पपरममाण ययजन कक पलरभमाषमा कनेवलि जहैन ज्ययलतष मम दक हहै। पपरममाण ययजन कमा अथर्ण यजकवर्वेद मम हहै। तकनयय कय लमलिमा कर पढ़नने पर पपणर्ण अथर्ण ममालिपम हयतमा हहै। ईषमादण्ड कक ममाप पकरमाण मम हहै इसकमा सशौर मण्डलि पपरसयग मम अथर्ण यजकवर्वेद कनेपपरथम मन्तपर मम हहै, यह सशौर वमायक कमा क्षनेतपर हहै। इसकमा अथर्ण गमाय दकहनने कने समय बछड़ने कय लनयलन्तपरत करनने वमालिक छड़क कने रूप मम लकयमा जमातमा हहै। पर पपरने यजकवर्वेद मम कहकय गमाय दकहनने कमा वणर्णन नहकय हहै। अन्य ममापयय कने बमारने मम ममान लिनेतने हह लक पपरमाचकन कमालि मम लबलिककलि ठकक ममाप हकयक थक। सहक ममाप हयनने पर हक ७ लियकयय कमा नमाम लिने सकतने हह। नहकय तय कनेवलि दय हक लियक हययगने -पकथ्वक, आकमार। वतर्णममान ममाप सने तकलिनमा कर ममाप कक इकमाई कमा लनधिमार्णरण करतने हह। (६) सप्तसयस्थमा-सवर्वेषमाय तक स नमाममालन कममार्णलण च पकथकप पकथकप। वनेद रब्दनेभ्य एवमादशौ पकथकप सयस्थमाश्च लनमर्णमने॥(मनक स्मकलत १/२१) यमास्सप्त सयस्थमा यमा एवहैतमास्सप्त हयतपरमात पपरमाचकवर्णषटप ककवर्णलन्त तमा एव तमात। (जहैलमनकय बपरमाहण उपलनषदप १/२१/४) छन्दमायलस वमाऽअस्य सप्त धिमाम लपपरयमालण । सप्त ययनकलरलत लचलतरनेतदमाह । (रतपथ बपरमाहण ९/२/३/४४, यजक १७/७९) आलधिभशौलतक रब्दयय कने हक आलधिदहैलवक और आध्यमालत्मक अथर्ण लवस्तमार हयतने हह। यने सभक अथर्ण परस्पर सम्बलन्धित हह, यमा ककछ सममानतमा रहतक हहै। आलधिभशौलतक रब्दयय कने भक भपगयलि, इलतहमास, लवजमान तथमा ललिलप-भमाषमा व्यवहमार कने कमारण अथर्ण मम अन्तर हयतमा हहै। वनेद कने खलनज सम्बन्धिक रब्दयय

(7)

कमा पपरचमार खलनज क्षनेतपर झमारखण्ड मम हक हहै। समकदपर सम्बन्धिक रब्द दलक्षण भमारत कने समकदपर तट पर हक हय सकतने हह, उनकय उत्तर पपरदनेर, पयजमाब मम खयजनमा मपखर्णतमा हयगक। इसक पपरकमार इन्दपर पपवर्ण लदरमा कने लियकपमालि थने, उनकने रब्द ओलड़रमा सने लवयतनमाम तक लमलिमगने। वरुण कने रब्द भमारत कने पलश्चम तट सने अरब तक हह। लरव तथमा ककलष यज सने सम्बलन्धित रब्द कमारक-लमलथलिमा आलद मम हक हह। आलधिदहैलवक रब्दयय कने अथर्ण ज्ययलतष यमा पकरमाण कने भकवन कयष मम खयजनमा चमालहयने। आध्यमालत्मक अथर्ण ययग-तन्तपर यमा आयकवर्वेद मम लमलि सकतने हह।

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