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VAIGYNANIK DYNAN KI VIKAS YATRA EANV ESAKE LIHITARTH

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Academic year: 2020

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JUNE-JULY, 2017, VOL. 4/22 www.srjis.com Page 5712 वैऻाननक ऻान की ववकास-मात्रा एवॊ इसके ननहहताथथ

गोऩार कृष्ण ठाकुय, Ph. D.

, , ( ), -

442001,

प्रस्तावना

भनुष्म की जजऻासा, उत्कॊठा एवॊ खोज की स्वाबाववक प्रवृजत्त तथा प्रकृनत के यहस्मों को सभझने एवॊ सुरझाने के लरए उसके द्वाया ककमे गए कामों से ही ववऻान का सृजन होता है. भनुष्म भूर रूऩ से जजऻासु प्राणी होता है औय उसी जजऻासा के परस्वरूऩ आहदकार से रेकय वतथभान सभम तक भनुष्म के द्वाया प्रकृनत, ऩरयवेश, वातावयण, एवॊ इस ब्रहभाॊड की सृजष्ि के सत्म को सभझने के लरए ककमे गए प्रमासों से ऻान के जजस ववशार बॊडाय का सृजन हुआ है एवॊ ऻान के सृजन की मह सतत प्रकिमा जायी है - उसी को ववऻान कहते हैं. ववऻान ने जहाॊ भनुष्म को वतथभान सभाज के इस स्वरूऩ को ववकलसत कयने, ननखायने एवॊ तात्कालरक तथा आसन्न सभस्माओॊ का ननयाकयण कयने मोग्म फनामा है, वहीॊ भानव सभुदाम के ऊऩय फहुत फड़ी जजम्भेदायी बी सौंऩी है. मह जजम्भेदायी है – वैऻाननक अनुसॊधानों एवॊ आववष्कायों का भानव जीवन के हहत भें उऩमोग कयना एवॊ ववऻान के दुरूऩमोग को योकना. इनतहास भें इस फात का अकाट्म प्रभाण है कक जफ जफ भनुष्म के हाथों ववऻान का दुरूऩमोग हुआ है – वह ऺण भानव सभ्मता के ववनाश का ऺण साबफत हुआ है. जाऩान के हहयोलशभा औय नागासाकी का अतीत इस फात का प्रभाण है कक ववऻान का

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JUNE-JULY, 2017, VOL. 4/22 www.srjis.com Page 5713 दुरूऩमोग न लसपथ ककसी सभाज के वतथभान को नष्ि कयता है फजकक उसका बववष्म बी ववऻान की ववनाशक बमावहता का दॊश झेरने के लरए वववश हो जाता है. ववऻान के इन तभाभ सकायात्भक एवॊ नकायात्भक ऩहरुओॊ ऩय होने वारी चचाथ के फावजूद मह सत्म है कक ववऻान भानव जीवन के लरए ननजचचत रूऩ से वयदान साबफत हुआ है. भानव सभाज के ववकास लरए वैऻाननक दृजष्िकोण से मुक्त नागरयकों का होना अनत आवचमक है. वैऻाननक दृजष्िकोण भनुष्म को सुव्मवजस्थत रूऩ से चचॊतन कयना एवॊ प्रत्मऺ अनुबवों के आधाय ऩय ननणथम रेने भें सहामता प्रदान कयता है. वैऻाननक दृजष्िकोण से मुक्त भनुष्म अपवाहों मा सुनी सुनाई फातों ऩय ववचवास नहीॊ कयता फजकक जफ तक ककसी घिना को तथ्मात्भक रूऩ से एवॊ प्रत्मऺत् प्रभाणणत नहीॊ कय रेता, उस ऩय ववचवास नहीॊ कयता है. वैऻाननक दृजष्िकोण की कई ववशेषताओॊ भें से एक प्रभुख ववशेषता है – स्वतन्त्र व सृजनात्भक चचॊतन. मह एक प्रभाणणत सत्म है कक स्वतन्त्र एवॊ सृजनात्भक चचॊतन से ही भनुष्म ने ववऻान के ऺेत्र भें ववलबन्न खोज, अनुसॊधान एवॊ आववष्काय ककमा है एवॊ ववऻान के साथ-साथ इसके सह-उत्ऩाद के तौय ऩय प्रौद्मोचगकी के अऩरयलभत ववकास के ऩरयणाभस्वरूऩ भानव सभ्मता ने आहदभ कार से अऩने वतथभान स्वरूऩ तक का सफ़य तम ककमा है.

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JUNE-JULY, 2017, VOL. 4/22 www.srjis.com Page 5714 प्रकिमा से गुजयना फतामा है, तो कई ववचायक ऐसे बी हुए हैं जो उऩयोक्त भान्मता से लबन्न याम यखते हैं. ऩाचचात्म जगत भें हुई औद्मोचगक िाॊनत एवॊ ऩुनजाथगयण के ववलबन्न कारखॊडों से गुजयने के िभ भें ववलबन्न ववचायकों की ववचायधायाओॊ ने वैऻाननक ऻान के स्वरूऩ, सॊयचना एवॊ रक्ष्म को नमा आमाभ हदमा है. इस आरेख के उत्तयवती खॊड भें वैऻाननक ऻान की ववकास-मात्रा ऩय एक ववहॊगभ दृजष्ि डारने की चेष्िा की गमी है.

वैऻाननक ऻान सॊफॊधी अयस्तु की सॊककऩना

ऩाचचात्म जगत भें भानवीम ऻान को सुव्मवजस्थत रूऩ प्रदान कयने भें प्रलसद्द दाशथननक व ववचायक अयस्तु (384 ई.ऩू. से 322 ई.ऩू.) का अनत-भहत्वऩूणथ मोगदान यहा है. मूॉ तो वैऻाननक ऻान के सुव्मवजस्थत रूऩ भें स्थावऩत होने के सॊफॊध भें ववलबन्न भत हो सकते हैं एवॊ कई ववचायकों को इसका श्रेम हदमा जा सकता है औय हदमा बी जाता है, तथावऩ वैऻाननक ऻान सॊफॊधी ववलबन्न ववचायधायाओॊ भें अयस्तु के आगभन-ननगभन सॊफॊधी लसद्ाॊत का प्रभुख मोगदान यहा है. अयस्तु ने वैऻाननक ऩृच्छा को मा खोज की प्रकिमा को ककसी घिना मा प्रकिमा के अवरोकन से रेकय साभान्मीकृत लसद्ाॊत तक की ववकासात्भक प्रगनत एवॊ ऩुन् साभान्मीकृत लसद्ाॊत से अवरोकन तक की सॊयचनात्भक प्रकिमा भाना है. अयस्तु के अनुसाय वैऻाननक ऻान की प्रगनत भुख्मत् प्रकृनत भें घहित होने वारी घिनाओॊ के आगभनात्भक एवॊ ननगभनात्भक वववेचन की प्रकिमा से होती है.

अयस्तू अनुबवलसद् लसद्ान्तों भें ववचवास यखने वारे मूनानी दाशथननकों भें से सवथप्रथभ तो नहीॊ थे रेककन अऩने सभकारीनों भें इसलरए अरग खड़े हदखाई देते थे कक वे फहुत ही सावधानी से औय सिीक ढॊग से कामथ कयते थे. वे फहुत फाय मह चचॊता प्रकि कयते थे कक उनके ऩूवथवनतथमों का कामथ राऩयवाह प्रेऺण (ऑ ॎब्ज़वेशन) का लशकाय था. फुननमादी तौय ऩय एक औय सन्दबथ भें वे उन सफसे

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JUNE-JULY, 2017, VOL. 4/22 www.srjis.com Page 5715 इस्तेभार के भहत्व ऩय ज़ोय देते थे. उनसे ऩहरे के दाशथननक तो प्रेऺण को केवर अनुभान रगाने हेतु एक प्रस्थान-बफन्दु के तौय ऩय प्रमोग भें राने की ओय प्रवृत्त थे, रेककन अयस्तू अऩने लसद्ान्तों की जाॉच-ऩयख प्रकृनत की कसौिी ऩय कयने को तैमाय यहते थे. वे इस फात ऩय फर देते थे कक अवरोकन औय प्रेऺण से हालसर ककए गए तथ्मों का भहत्व लसद्ान्तों के भुकाफरे अचधक है. एक औय तत्व है जो उऩयोक्त दो ववशेषताओॊ के साथ लभरकय एक फहुत ही भज़फूत कामथप्रणारी प्रदान कयता है - कड़ाई के साथ, ताककथक आधाय ऩय कायण-कामथ सम्फन्धों का प्रमोग कयते हुए ऐसी कायणात्भक ऩरयककऩ-नाओॊ का ववकास जजन्हेंअनुबव आधारयत प्रभाणों की भदद से जाॉचा जा सके.

फ्ाॊलसस फेकन की सॊककऩना

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JUNE-JULY, 2017, VOL. 4/22 www.srjis.com Page 5716 फेकन के ववचाय भें अनुबव आधारयत प्रेऺण मानी अवरोकन तथा ववचधवत, व्मवजस्थत प्रमोग के भाध्मभ से ही ककसी ऩरयककऩना (हाइऩॉचथलसस) को उऩमुक्त ढॊग से ऩयखा जा सकता है - उनकी नज़य भें ऩयख का मही एकभात्र तयीका था। ववऻान के ववकास भें फेकन का मोगदान मही है कक उन्होंने इस फात के भहत्व को चचजन्हत ककमा। उनके द्वाया हदए गए तकथ आने वारी दो सहदमों भें भुख्मत् ववऻान के सैद्ाॊनतक एवॊ अनुप्रमुक्त ऺेत्र भें कामथयत वैऻाननकोंके लरए फहुत प्रबावशारी लसद् हुए।

औद्मोचगक िाॊनत एवॊ वैऻाननक ऻान का ववकास

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JUNE-JULY, 2017, VOL. 4/22 www.srjis.com Page 5717 ताककथक प्रत्मऺवाद / ताककथक ववधेमवाद

फीसवीॊ सदी के प्रायॊब भें ताककथक ववधेमवाद मा ताककथक प्रत्मऺवाद की ववचायधाया का प्रफर प्रादुबाथव हुआ जजसके अनुसाय वैऻाननक ऻान की सॊऻानात्भक साथथकता इस फात भें ननहहत होती है कक सबी प्रकाय के भानव-अनुबवों का अऩचमन अॊतत् शुद् रूऩ से औऩचारयक कथन मा तकथ के रूऩ भें हो अथवा वह वैऻाननक ऻान प्रत्मऺत् सत्मावऩत एवॊ प्रभाणणत होने मोग्म हो. इसके अनतरयक्त सभस्त प्रकाय के कथन मा सूचनाएॊ वैऻाननक ऻान की श्रेणी भें नहीॊ भानी जा सकती. जजन हदनों मह ववचायधाया एक दृढ आकाय रे यही थी, उस कार-िभ की ववलशष्िता ऩाचचात्म जगत भें औद्मोचगक िाॊनत एवॊ ऩुनजाथगयण कार के साथ-साथ प्रथभ ववचवमुद् के ऩूवथ एवॊ ऩचचात के साभाजजक-याजनीनतक ऩरयजस्थनतमों से बी ऩरयबावषत हो यही थी. एक तयप ववऻान ववकास िभ के ववलबन्न चयणों को ऩाय कयता जा यहा था, तो दूसयी ओय वैऻाननक ऻान एवॊ तकनीक शजक्त-प्रदशथन के उऩकयण के रूऩ भें स्थावऩत हो यहा था. ऐसे भें वैऻाननक ऻान को प्रत्मऺ अनुबव एवॊ सत्माऩन तथा प्रभाण आधारयत सॊककऩना से ऩरयबावषत कयने वारी ताककथक ववधेमवाद की ववचायधाया ने फुवद्जीवी अकादलभक जगत भें स्वमॊ को स्थावऩत ककमा. ताककथक ववधेमवाद ने दाशथननक चचॊतन के तत्वभीभाॊसीम आमाभ को रगबग नकाय ही हदमा. इसके ऩीछे ताककथक प्रत्मऺवाद मा ताककथक ववधेमवाद की दो भूर अवधायणाएॊ थीॊ जजनके अनुसाय ऻान के भात्र दो स्रोत सॊबव हैं – (1 ) ताककथक चचॊतन एवॊ (2) प्रत्मऺ अनुबव. महाॉ ताककथक ऻान भें गणणत मा गणणतीम ऻान सभाहहत है जफकक अनुबवलसद् ऻान भें बौनतक ववऻान, यसामन ववऻान, जीव ववऻान एवॊ भनोववऻान आहद जैसे ऻानानुशासन सजम्भलरत हो सकते हैं.

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JUNE-JULY, 2017, VOL. 4/22 www.srjis.com Page 5718 ऩय जहाॊ कुछ ववचायक भनोववऻान को अऩनी भान्मताओॊ के आधाय ऩय ववऻान की श्रेणी भें स्थान देते हैं, वहीॊ वैऻाननक सभुदाम के ववचायक इसे (भनोववऻान को) “छद्म-ववऻान” का नाभ देते हैं. एवॊ इन जैसे अन्म ऻानानुशासनों जैसे ज्मोनतष ववऻान, एवॊ भानव सभाज भें व्माप्त अनेकानेक ऐसे ऺेत्रों को ववऻान की श्रेणी भें स्थान नहीॊ देते हैं. मद्मवऩ ववऻान एवॊ छद्म-ववऻान सॊफॊधी मह वववाद एक तयह से ना सभाप्त होने वारा वववाद है जजसके ऩऺ एवॊ ववऩऺ भें अनेकानेक तकथ हदए जाते यहे हैं औय आगे बी हदए जाते यहेंगे.

थॉभस कुहन की वैऻाननक िाॊनत की सॊयचना सॊफॊधी अवधायणा

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JUNE-JULY, 2017, VOL. 4/22 www.srjis.com Page 5719 से वैऻाननक सभुदाम भानव सभ्मता के सभऺ उत्ऩन्न सबी सभस्माओॊ का सभाधान कय सके मा सबी प्रकाय की चुनौनतमों का हर ननकार सके। फजकक वैऻाननक ऻान की साभान्म अवस्था भें वैऻाननक सभुदाम के रोग भात्र “ऩहेरी सुरझाने” बय का कामथ कयते हैं। इस कार भें फहुत सी ऐसी सभस्माएॉ बी उत्ऩन्न होती हैं जजनका हर वैऻाननक सभुदाम के ऩास मा उस ववशेष ऩैयाडाइभ की ऩरयचध भें नहीॊ होता है। प्रायॊब भें तो मह फातें उतनी गॊबीय नहीॊ भानी जाती हैं, ऩयॊतु जफ सभस्माओॊ मा चुनौनतमों की अचधकता होने से ववसॊगनतमाॉ अत्मचधक होने रगती हैं तो वैऻाननक सभुदाम के रोग एक वैकजकऩक ऩैयाडाइभ की तराश कयते हैं औय वऩछरे ऩैयाडाइभ की ऩरयचध से भुक्त होकय एक सवथथा नवीन ऩैयाडाइभ को अऩनाते हैं एवॊ नए प्रकाय से, नमी मुजक्तमों से सभस्माओॊ का सभाधान सुझाना प्रस्ताववत कयते हैं। मह एक प्रकाय से वैऻाननक ऻान के ववकास-िभ भें िाजन्त के सभान होता है। इस प्रकिमा को कुहन ने “ऩैयाडाइभ लशफ्ि” का नाभ हदमा।

उत्तय-आधुननककार एवॊ ववऻान

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JUNE-JULY, 2017, VOL. 4/22 www.srjis.com Page 5720 वे अनुबव बी तो ऩूणथत: वैमजक्तक होता है, औय मह आवचमक नहीॊ है कक वैमजक्तक अनुबव सवथदा एक सभान हों। ऐसी जस्थनत भें ऻानप्राजप्त की वस्तुननष्ठ ववधा अऩने आऩ भें सॊहदग्ध है।

उऩमुथक्त खॊड भें प्रस्तुत ववभशथ सम्ऩूणथ नहीॊ हैं। इस ववभशथ के अन्म कई आमाभ हैं जजसका उकरेख इस आरेख भें नहीॊ ककमा जा यहा है। ऩयॊतु एक फात ननववथवाद रूऩ से काही जा सकती है कक वैऻाननक ऻान सॊफॊधी ववचायधायाओॊ भें सभम के साथ-साथ ववववधता के अनेक आमाभ जुड़े हैं एवॊ ककसी एक आमाभ के सहाये ववऻान को मा वैऻाननक ऻान की अवधायणा को सभझना अऩूणथ ही होगा। हाराॊकक सबी ववचायधाओॊ भें एक फात ववद्मभान है कक ववऻान एवॊ वैऻाननक ऻान भें सृजनशीरता, वैववध्म, गनतशीरता, स्वमॊ को चुनौती देने की प्रवृनत, नवाचाय एवॊ सतत गवेषणा की प्रकृनत अॊतननथहहत होती है।

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JUNE-JULY, 2017, VOL. 4/22 www.srjis.com Page 5722 को लभरकय ढूॉढना चाहहए तबी हभ याष्र ननभाथण की हदशा भें साथथक प्रमत्न कय ऩाएॊगे एवॊ ऻान के ववचवगुरु के रूऩ भें बायत के वैबवशारी अतीत को ऩुन् प्रनतजष्ठत कय ऩाने भें सपर हो ऩाएॊगे.

सन्दबथ

https://vigyanvishwa.in/201 6/06/20/pseudoscience/

https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%9B%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%

AE_%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E

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https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A5%8

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.BF.E0.A4.B7.E0.A4.AF

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http://sciencepolicy.colorado.edu/students/envs_51 1 0/structure_of_scientific_revolutions. pdf

http://projektintegracija.pravo.hr/_download/repository/Kuhn_Structure_of_Scientific_Rev olutions.pdf

References

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