Hichki Rokna:Agr Pani Se Hichki Na Rukay Tou 1 Long Kha Lein.
Pimples:Garmi Ki Waje Se Honay Walay Pimples Par Pan Mein Use Honay Wala
Choona Use Karen Pimples Khatam Hojayengay.Bachoon K Daant:Jab Noumolood Bachon K Daant Nikalnay Walay Hoon Tou In K Gums Par Honey Or SaltMila Kar Lagayen Or Galay Mein 1 Chwara Kali Dori Mein Piro K Daal Dein, DaantBegair Kisi Takleef K Nikal Ayengay.Headache:Daarchini Ko Pees Kar Forehead Par Iska Laip Lagayen.Sir Par Kaddu Ki Malish Karen.Weight Barhanay K Lye:1 Apple Ki Kashen Kat Kar Raat Ko Khulay Asman K Nichay Aisi Jage Rakhen JahanisPar Shabnum Parti Rahay Or Subha Moon Haath Dho K Yeh Apple Khalein. Is Se AapKa Weight Bhi Sahi Hojayega Or Face Par Shine Bhi Ayegi.Gas Or Qabz:Patton Wali Muli Shehad Or Namak K Sath Mila Kar Kahyen, Insha Allah 1 Week MeinGas Or Qabz Se Nijat Mil Jayegi.Hath Jal Jaey Tou:Agr Hath Jal Jaye Tou Mutasira Jage Par Kachha Doodh Laganay Se Foran Aram MiltaHai.Jalay Hwe Hisse Par Glycerin Ya Neel
Laganay Se Aabla Nahi Parta.Height Barhanay K Lye:Rozana 10 Se 12 Hrs Ki Neend Karen Or Lait Kar Hath Per Angrai Ki Surat Phelayen, Height Mein Izafa Hoga.Sweeting:Agr Aap K Paoun Mein Sweeting Zyada Hoti Ho Tou Neem Garam Pani Mein Sirka Ya Lemon Juice Mila Kar Paoun Dhoen, Sweeting Hona Band
Hojayegi.Chehray Ki Khushki:Aksar Winter Season Mein Face Buhat Dry Hojata Hai Is Dryness Se Bachnay K Lye 5-6 Badamen Pani Mein 4-5 Hrs K Lye Bhigo K
Rakhdein, Jab Naram Hojayen Tou RagarK Face Par Lagayen Or Jab Dry Hojaye Tou Ise Apni Finger Ki Madad Se Utarlein Or Pani Se Moun Dholein. Is Se Kuch Dinon Mein Dryness Khatam Hojayegi.Lips Ki Surkhi:Raat Ko Honton Par Zafran Laga Kar 10- 15 Minutes K Lye Chordein Phir Lips Dholein, 10
15 Dinon Mein Aap K Honton Pe Natural Surkhi Ajayegi.Zyada Chenkein Aana:Agr Buhat Zyada Chenkein Arahi Hoon Tou Sir Par Thanda Pani Baar Baar Dalnay SeChenkein Ana Band Hojati Hain.Pait K Keeray:Apnay Bachon Ko Peach Buhat Khilaya Karen, Is Se Bachon K Pait K Keeray Mar Jatay Hain.Gums Ka Phoolna:Agr Kabhi Gums Phool Jayen Tou Dry Tobacco Ko 5-6 Leaves Le Kar Pees Lein Or Phoolay Hwe Gums Par Lagayen, Inshaallah Sojan Khatam Hojayegi
भारतीय संस्कृित मे भिविष्यविाणी के ज्ञान का िविशाल भंडार िनिहित हिै। तकनीकी रूप से इनका कोई िलिखित इितहिास नहिीं हिै लेिकन पीढ़ी-दर-पीढ़ी यहि ज्ञान हिस्तांतिरत हिो रहिा हिै और मानना हिोगा िक इनके माध्यम से की गई भिविष्यविािणयां अचूक िसद्ध हिोती हिै। प्रस्तुत हिै परंपरागत रूप से िमला कुछ अनोखिा संकलन - * चींटी दाना इकट्ठा करती हिै और यिद तीतर चुग जाता हिै तो यहि अपशकुन हिै। * िजस पेड़ पर बगुला बैठे उस पेड़ का नाश हिो जाता हिै। * 7 दांतों का बैल अपने स्विामी को खिा जाता हिै और 9 दांतों का बैल स्विामी और उसके पिरविार को खिा जाता हिै। * हिोली, लोहिड़ी और िदविाली िजस विषर मे क्रमश: शिन, रिवि, मंगलविार मे हिो तो देश मे बड़ी भारी बीमारी लगती हिै।
FILE • यिद िगरिगट नीचे की ओर मुंहि करके उल्टा पेड़ पर चढ़े तो विषार से पृथ्विी डूब जाएगी। * प्रात:काल चारपाई से उठकर थोड़ा-सा बासी पानी िपएं और अपने दोनों हिाथों को देखिे तो विहि व्यिक्ति कभी बीमार नहिीं हिोता। * चैत्र मे गुड़, विैशाखि मे तेल, जेष्ठ मे रास्ता चलना, आषाढ़ मे िबल्वि (बेलफल), साविन मे साग, भादौ मे दहिी, अस्सू मे दूध, काितरक मे मट्ठा, अगहिन मे जीरा, पौष मे धिनया, माघ मे िमश्री, फागुन मे चना चबाना, बड़ा हिी हिािनकारक हिै। * यिद माघ मे बादलों का रंग लाल हिो तो अविश्य हिी ओला पड़ता हिै। नोट : यहि जानकारी परंपरागत रूप से प्राप्त ज्ञान पर आधािरत हिै। पाठकों की सहिमित-असहिमित स्वििविविेक पर िनभरर हिै।
कुछ उपयोगी टोटके
शत्रु शमन के िलए : साबुत उड़द की काली दाल के 38 और चाविल के 40 दाने िमलाकर िकसी गडे मे दबा दे और ऊपर से नीबू िनचोड़ दे। नीबू िनचोड़ते समय शत्रु का नाम लेते रहिे, उसका शमन हिोगा और विहि आपके िविरद्ध कोई कदमनहिींउठाएगा। अकारण परेशान करने विाले व्यिक्ति से शीघ छुटकारा पाने के िलए : यिद कोई व्यिक्ति बगैर िकसी कारण के परेशान कर रहिा हिो, तो शौच िक्रया काल मे शौचालय मे बैठे- बैठे विहिीं के पानी से उस व्यिक्ति का नाम िलखिे और बाहिर िनकलने से पूविर जहिां पानी से नाम िलखिा था, उस स्थान पर अप बाएं पैर से तीन बार ठोकर मारे। ध्यान रहिे, यहिप्रयोग स्विाथरविश न करे, अनयथा हिािन हिो सकती हिै।शत्रुओं का नाश करे बगुलामुखिी यंत्र आज लोग अपनी िविफलता से दुखिी नहिीं, बिल्क पड़ोसी की सफलता से दुखिी हिै। ऐसे मे उन लोगों को सफलता देने के िलए माताओं मे माता बगलामुखिी (विाल्गामुखिी) मानवि कल्याण के िलये किलयुग मे प्रतयक फल प्रदान करती रहिी हिै। आज इनहिीं माता, जो दुषों का संहिार करती हिै। अशुभ समय का िनविारण कर नई चेतना का संचार करती हिै। ऐसी माता के बारे मे मै अपनी अल्प बुिद्ध से आपकी प्रसनता के िलए इनकी सेविा आराधना पर कुछ कहिने का साहिस कर रहिा हिूं। मुझे आशा हिी नहिीं विरन पूणर िविश्विास हिै िक मै माता विाल्गामुखिी (बगलामुखिी) की जो बाते आपसे कहि रहिा हिूं अगर आप उसका तिनक भी अनुसरण करते हिै तो माता आप पर कृपा जरूर करेगी, लेिकन पाठक भाइयों ध्यान रहिे। इनकी साधना अथविा प्राथरना मे आपकी श्रद्धा और िविश्विास असीम हिो तभी मां की शुभ दिष आप पर पड़ेगी। इनकी आराधना करके आप जीविन मे जो चाहिे जैसा चाहिे विैसा कर सकते हिै। सामानयत: आजकल इनकी सविारिधक आराधना राजनेता लोग चुनावि जीतने और अपने शत्रुओं को परास्त करने मे अनुष्ठान स्विरूप करविाते हिै। इनकी आराधना करने विाला शत्रु से कभी परास्त नहिीं हिो सकता, विरन उसे मनमाना कष ï पहिुंच सकता हिै। विषर 2004 के चुनावि मे तो कई राजनेताओं िजनका नाम लेना उिचत नहिीं हिै ने माता बगलामुखिी की आराधना करके (पंिडतों दारा) चुनावि भी जीते और अचछे मंत्रालय भी प्राप्त िकये। माता की यहिी आराधना युद्ध, विाद-िविविाद मुकदमे मे सफलता, शत्रुओं का नाश, मारण, मोहिन, उचचाटन, स्तमभन, देविस्तमभन, आकषरण कलहि, शत्रुस्तभन, रोगनाश, कायरिसिद्ध, विशीकरण व्यापार मे बाधा िनविारण, दुकान बाधना, कोखि बाधना, शत्रु विाणी रोधक आिद कायों की बाधा दूर करने और बाधा पैदा करने दोनों मे की जाती हिै। साधक अपनी इचछानुसार माता को प्रसन करके इनका आशीविारद प्राप्त कर सकता हिै। जैसा िक पूविर मे उलेखि िकया जा चुका हिै िक माता श्रद्धा और िविश्विास से आराधना (साधना) करने पर अविश्य प्रसन हिोंगी, लेिकन ध्यान रहिे इनकी आराधना (अनुष्ठान) करते समय बहचयर परमाविश्यक हिै। गृहिस्थ भाइयों के िलये मै माता की आराधना का सरल उपाय बता रहिा हिूं। आप इसे करके शीघ फल प्राप्त कर सकते हिै। िकसी भी देविी-देविता का अनुष्ठान (साधना) आरमभ करने बैठे तो सविरप्रथम शुभ मुहिूरत, शुभ िदन, शुभ स्थान, स्विचछ विस, नये ताम पूजा पात्र, िबना िकसी छल कपट के शांत िचत, भोले भावि से यथाशिक्ति यथा सामगी, बहचयर के पालन की प्रितज्ञा कर यहि साधना आरमभ कर सकते हिै। याद रहिे अगर आप अित िनधरन हिो तो केविल पीले पुष्प, पीले विस,
हिल्दी की 108 दाने की माला और दीप जलाकर माता की प्रितमा, यंत्र आिद रखिकर शुद्ध आसन कमबल, कुशा या मृगचयर जो भी हिो उस पर बैठकर माता की आराधना कर आशीविारद प्राप्त कर सकते हिै। माता बगलामुखिी की आराधना के िलये जब सामगी आिद इकट्ठा करके शुद्ध आसन पर बैठे (उतर मुखि) तो दो बातों का ध्यान रखिे, पहिला तो यहि िक िसद्धासन या पदासन हिो, जप करते समय पैर के तलुओं और गुह स्थानों को न छुएं शरीर गला और िसर सम िस्थत हिोना चािहिए। इसके पश्चात गंगाजल से िछड़कावि कर (स्वियं पर) यहि मंत्र पढे- अपिवित्र: पिवित्रो विा सविारविस्थाङतोऽिपविा, य: स्मरेत, पुणडरी काकं स बाह अभयांतर: शुिच: । उसके बाद इस मंत्र से दािहिने हिाथ से आचमन करे- ऊं केशविाय नम:, ऊं नारायणाय नम:, ऊं माधविाय नम: । अनत मे ऊं हषीकेशाय नम: कहिके हिाथ धो लेना चािहिये। इसके बाद गायत्री मंत्र पढ़ते हिुए तीन बार प्राणायाम करे। चोटी बांधे और ितलक लगाये। अब पूजा दीप प्रजजवििलत करे। िफर िविघनिविनाशक गणपित का ध्यान करे। याद रहिे ध्यान अथविा मंत्र समबंिधत देविी-देविता का टेलीफोन नंबर हिै। जैसे हिी आप मंत्र का उचचारण करेगे, उस देविी-देविता के पास आपकी पुकार तुरंत पहिुंच जायेगी। इसिलये मंत्र शुद्ध पढऩा चािहिये। मंत्र का शुद्ध उचचारण न हिोने पर कोई फल नहिीं िमलेगा, बिल्क नुकसान हिी हिोगा। इसीिलए उचचारण पर िविशेष ध्यान रखिे। अब आप गणेश जी के बाद सभी देविी-देविािद कुल, विास्तु, नविगहि और ईष देविी-देवितािद को प्रणाम कर आशीविारद लेते हिुए कष का िनविारण कर शत्रुओं का संहिार करने विाली विाल्गा (बंगलामुखिी) का िवििनयोग मंत्र दािहिने हिाथ मे जल लेकर पढ़े- ऊं अस्य श्री बगलामुखिी मंत्रस्य नारद ऋिष: ित्रषुपछनद: बगलामुखिी देविता, हींबीजम् स्विाहिा शिक्ति: ममाभीष िसध्यथे जपे िवििनयोग: (जल नीचे िगरा दे) । अब माता का ध्यान करे, याद रहिे सारी पूजा मे हिल्दी और पीला पुष्प अिनविायर रूप से हिोना चािहिए। ध्यान-मध्ये सुधािबध मिण मणडप रतन विेदां, िसंहिासनो पिरगतां पिरपीत विणारम, पीतामबरा भरण माल्य िविभूिषताडगीं देविीं भजािम धृत मुदगर विैिरिजहाम िजहाग मादाय करेण देविीं, विामेन शत्रून पिरपीडयनतीम, गदािभघातेन च दिकणेन, पीतामबराढां िदभुजां नमािम॥
अपने हिाथ मे पीले पुष्प लेकर उपरोक्ति ध्यान का शुद्ध उचचारण करते हिुए माता का ध्यान करे। उसके बाद यहि मंत्र जाप करे। साधक ध्यान दे, अगर पूजा मै िविस्तार से कहिूंगा तो आप भिमत हिो सकते हिै। परंतु श्रद्धा-िविश्विास से इतना हिी करेगे िजतना कहिा जा रहिा हिै तो भी उतना हिी लाभ िमलेगा। जैसे िविष्णुसहिस नाम का पाठ करने से जो फल िमलता हिै विहिी ऊं नमोऽभगविते विासुदेविाय से, यहिां मै इसिलये इसका िजक्र कर रहिा हिूं तािक आपके मन मे कोई संशय न रहिे। राम कहिना भी उतना हिी फल देगा। अत: थोड़े मंत्रो के िदये जाने से कोई संशय न करे। अब िजसका आपको इंतजार था उन माता बगलामुखिी के मंत्र को आपके समक प्रस्तुत कर रहिा हिूं। मंत्र हिै : ऊं हीं बगलामुिखि! सविर दुषानां विाचं मुखिं पदं स्तमभय स्तमभय िजहां कीलय कीलय बुिद्धं िविनाशय हीं ऊंस्विाहिा। इस मंत्र का जाप पीली हिल्दी की गांठ की माता से करे। आप चाहिे तो इसी मंत्र से माता की षोडशोपचार िवििध से पूजा भी कर सकते हिै। आपको कम से कम पांच बाते पूजा मे अविश्य ध्यान रखिनी हिै-1. बहचयर, 2. शुद और स्विचछ आसन 3. गणेश नमस्कार और घी का दीपक 4. ध्यान और शुद्ध मंत्र का उचचारण 5. पीले विस पहिनना और पीली हिल्दी की माला से जाप करना। आप कहिेगे मै बार- बार यहिी साविधानी बता रहिा हिूं। तो मै कहिूंगा इससे गलती करोगे तो माता शायद हिी कमा करे। इसिलये जो आपके विश मे हिै, उसमे आप फेल न हिों। बाकी का काम मां पर छोड़ दे। इतनी सी बाते आपकी कामयाबी के िलये काफी हिै। अिधकािरयों को विश मे करने अथविा शत्रुओं दारा अपने पर हिो रहिे अतयाचार को रोकने के िलए यहि अनुष्ठान पयारप्त हिै। ितल और चाविल मे दूध िमलाकर माता का हिविन करने से श्री प्रािप्त हिोती हिैैै और दिरदता दूर भागती हिै। गूगल और ितल से हिविन करने से कारागार से मुिक्ति िमलती हिै। अगर विशीकरण करना हिो तो उतर की ओर मुखि करके और धन प्रािप्त के िलए पिश्चम की ओर मुखि करके हिविन करना चािहिए। अनुभूत प्रयोग कुछ इस प्रकार हिै। मधु, शहिद, चीनी, दूविार, गुरच और धान के लाविा से हिविन करने से समस्त रोग शानत हिो जाते हिै। िगद्ध और कौए के पंखि को सरसों के तेल मे िमलाकर िचता पर हिविन करने से शत्रु तबाहि हिो जाते हिै। भगविान िशवि के मिनदर मे बैठकर सविा लाखि जाप िफर दशांश हिविन करे तो सारे कायर िसद्ध हिो जाते हिै। मधु घी, शककर और नमक से हिविन आकषरण (विशीकरण) के िलए प्रयोग कर सकते हिै। इसके अितिरक्ति भी बड़े प्रयोग हिै िकनतु इसका कहिीं गलत प्रयोग न कर िदया जाए जो समाज के िलए िहितकारी न हिो इसिलये देना उिचत नहिीं हिै। अत: आप स्वियं के कल्याण के िलए माता की आराधना कर लाभ
उठा सकते हिै। यहिां संिकप्त िवििध इसिलये दी गई हिै िक सामानय प्राणी भी माता की आराधना कर लाभािनवित हिो सके। यहि गृहिस्थ भाइयों के िलए भी पयारप्त हिै। __________________________________________________ __________________________________ नजर उतारने के प्राचीन उपाय 1. नमक, राई, राल, लहिसुन, पयाज के सूखिे िछलके वि सूखिी िमचर अंगारे पर डालकर उस आग को रोगी के ऊपर सात बार घुमाने से बुरी नजर का दोष िमटता हिै। 2. शिनविार के िदन हिनुमान मंिदर मे जाकर प्रेमपूविरक हिनुमान जी की आराधना कर उनके कंधे पर से िसंदूर लाकर नजर लगे हिुए व्यिक्ति के माथे पर लगाने से बुरी नजर का प्रभावि कम हिोता हिै। 3. खिाने के समय भी िकसी व्यिक्ति को नजर लग जाती हिै। ऐसे समय इमली की तीन छोटी डािलयों को लेकर आग मे जलाकर नजर लगे व्यिक्ति के माथे पर से सात बार घुमाकर पानी मे बुझा देते हिै और उस पानी को रोगी को िपलाने से नजर दोष दूर हिोता हिै। 4. कई बार हिम देखिते हिै, भोजन मे नजर लग जाती हिै। तब तैयार भोजन मे से थोड़ा-थोड़ा एक पते पर लेकर उस पर गुलाब िछड़ककर रास्ते मे रखि दे। िफर बाद मे सभी खिाना खिाएँ। नजर उतर जाएगी। 5. नजर लगे व्यिक्ति को पान मे गुलाब की सात पंखिुिड़याँ रखिकर िखिलाए। नजर लगा हिुआ व्यिक्ति इष देवि का नाम लेकर पान खिाए। बुरी नजर का प्रभावि दूर हिो जाएगा। 6. लाल िमचर, अजविाइन और पीली सरसों को िमटटी के एक छोटे बतरन मे आग लेकर जलाएँ। िैफर उसकी धूप नजर लगे बचचे को दे। िकसी प्रकार की नजर हिो ठीक हिो जाएगी। नज़र बाधा
1. आप अपने नए मकान को बुरी नजर से बचाना चाहिते हिै तो मुखय दार की चौखिट पर काले धागे से पीली कौड़ी बांधकर लटकाने से समस्त ऊपरी बाधाओं से मुिक्ति िमलती हिै। 2. यिद आपने कोई नया विाहिन खिरीदा हिै और आप इस बात से परेशान हिै िक कुछ न कुछ रोज विाहिन मे गड़बड़ी हिो जाती हिै। यिद गड़बड़ी नहिीं हिोती तो दुघरटना मे चोट-चपेट लग जाती हिै औरबेकार के खिचर से सारी अथर- व्यविस्था चौपट हिो जाती हिै। अपने विाहिन पर काले धागे से पीली कौड़ी बांधने से आप इस बुरी नजर से बच सकेगे, करके परेशानी से मुक्ति हिो जाएं। 3. यिद आपके घर पर रोज कोई न कोई आपदा आ रहिी हिै। आप इस बात को लेकर परेशान हिै िक कहिीं िकसी ने कुछ कर तो नहिीं िदया। ऐसे मे आपको चािहिए िक एक नािरयल को काले कपड़े मेिसलकर घर के बाहिर लटका दे। 4. िमचर, राई वि नमक को पीिड़त व्यिक्ति के िसर से विार कर आग मे जला दे। चंदमा जब राहिु से पीिड़त हिोता हिै तब नजर लगती हिै। िमचर मंगल का, राई शिन का और नमक राहिु का प्रतीक हिै। इन तीनों को आग (मंगल का प्रतीक) मे डालने से नजर दोष दूर हिो जाता हिै। यिद इन तीनों को जलाने पर तीखिी गंध न आए तो नजर दोष समझना चािहिए। यिद आए तो अनय उपाय करने चािहिए। टोटका तीन- यिद आपके बचचे को नजर लग गई हिै और हिर विक्ति परेशान वि बीमार रहिता हिै तो लाल साबुत िमचर को बचचे के ऊपर से तीन बार विार कर जलती आग मे डालने से नजर उतर जाएगी और िमचर का धचका भी नहिीं लगेगा। 5. यिद कोई व्यिक्ति बुरी नजर से परेशान हिै तो िक शिनविार के िदन कचचा दूध उसके ऊपर से सात बार विारकर कुते को िपला देने से बुरी नजर का प्रभावि दूर हिो जाता हिै। 6. यिद कोई व्यिक्ति बुरी नजर से परेशान हिै तो िक मंगलविार के िदन हिनुमान मंिदर जाकर उनके कनधे से िसनदुर लेकर नजर लगे व्यिक्ति के माथे पर यहि सोचकर ितलक कर दे िक यहि नजर दोष से मुक्ति हिो गया हिै। िदमाग से िचनता हिटाने का टोटका अिधकतर पािरविािरक कारणों से िदमाग बहिुत हिी उतेजना मे आजाता हिै,पिरविार की िकसी समस्या से या लेन देन से,अथविा िकसी िरस्तेनाते को लेकर िदमाग एक
दम उदेिलत हिोने लगता हिै,ऐसा लगने लगता हिै िक िदमाग फ़ट पडेगा, इसका एक अनुभूत टोटका हिै िक जैसे हिी टेसन हिो एक लोटे मे या जग मे पानी लेकर उसके अनदर चार लालिमचर के बीज डालकर अपने ऊपर सात बार उबारा (उसारा) करने के बाद घर के बाहिर सडक पर फ़ेक दीिजये,फ़ौरन आराम िमल जायेगा। . 7. यिद आपके बचचे को बार- बार नजर लग जाती हिै तो आपको चािहिए िक आप उसके गले मे रीठे का एक फल काले धागे मे उसके गले मे पहिना दे। 8. यिद आप नजर दोष से मुक्ति हिोना चाहिते हिै तो सूती कोरे कपड़े को सात बार विारकर सीधी टांग के नीचे से िनकालकर आग मे झोंक दे। यिद नजर हिोगी तो कपड़ा जल जाएगा वि जलने की बदबू भी नहिीं आएगी। यहि प्रयोग बुधविार एविं शिनविार को हिी कर सकते हिै। 9. टोटका नौ- यिद कोई बचचा नजर दोष से बीमार रहिता हिै और उसका समस्त िविकास रक गया हिै तो िफटकरी एविं सरसों को बचचे पर से सात बार विारकर चूल्हिे पर झोंक देने से नजर उतर जाती हिै। यिद यहि सुबहि, दोपहिर एविं सायं तीनों समय करे तो एक हिी िदन मे नजर दोष दूर हिो जाता हिै। मानिसक परेशानी दूर करने के िलए : रोज़ हिनुमान जी का पूजन करे वि हिनुमान चालीसा का पाठ करे ! प्रतयेक शिनविार को शिन को तेल चढाये ! अपनी पहिनी हिुई एक जोडी चपपल िकसी गरीब को एक बार दान करे ! घर से पराशिक्तियों को हिटाने का टोटका एक कांच के िगलास मे पानी मे नमक िमलाकर घर के नैऋतय के कोने मे रखि दीिजये,और उस बल्ब के पीछे लाल रंग का एक बल्वि लगा दीिजये, जब भी पानी सूखि जाये तो उस िगलास को िफ़र से साफ़ करने के बाद नमक िमलाकर पानी भर दीिजये। व्यिक्तिगत बाधा िनविारण के िलए व्यिक्तिगत बाधा के िलए एक मुट्ठी िपसा हिुआ नमक लेकर शाम को अपने िसर के ऊपर से तीन बार उतार ले और उसे दरविाजे के बाहिर फेके। ऐसा तीन िदन
लगातार करे। यिद आराम न िमले तो नमक को िसर के ऊपर विार कर शौचालय मे डालकर फलश चला दे। िनिश्चत रूप से लाभ िमलेगा। हिमारी या हिमारे पिरविार के िकसी भी सदस्य की गहि िस्थित थोड़ी सी भी अनुकूल हिोगी तो हिमे िनश्चय हिी इन उपायों से भरपूर लाभ िमलेगा। बनता काम िबगडता हिो, लाभ न हिो रहिा हिो या कोई भी परेशानी हिो तो : 1. हिर मंगलविार को हिनुमान जी के चरणों मे बदाना ( मीठी बूंदी) चढा कर उसी प्रशाद को मंिदर के बाहिर गरीबों मे बांट दे ! 2. व्यापार, िविविाहि या िकसी भी कायर के करने मे बार- बार असफलता िमल रहिी हिो तो यहि टोटका करे- सरसों के तैल मे िसके गेहिूँ के आटे वि पुराने गुड़ से तैयार सात पूये, सात मदार (आक) के पुष्प, िसंदूर, आटे से तैयार सरसों के तैल का रूई की बती से जलता दीपक, पतल या अरणडी के पते पर रखिकर शिनविार की राित्र मे िकसी चौराहिे पर रखिे और कहिे -“ हिे मेरे दुभारगय तुझे यहिीं छोड़े जा रहिा हिूँ कृपा करके मेरा पीछा ना करना। सामान रखिकर पीछे मुड़कर न देखिे। िकसी रोग से गिसत हिोने पर : सोते समय अपना िसरहिाना पूविर की ओर रखिे ! अपने सोने के कमरे मे एक कटोरी मे सेधा नमक के कुछ टुकडे रखिे ! सेहित ठीक रहिेगी ! एक रपये का िसकका रात को िसरहिाने मे रखि कर सोएं और सुबहि उठकर उसे श्मशान के आसपास फेक दे, रोग से मुिक्ति िमल जाएगी। लगातार बुखिार आने पर 1. यिद िकसी को लगातार बुखिार आ रहिा हिो और कोई भी दविा असर न कर रहिी हिो तो आक की जड लेकर उसे िकसी कपडे मे कस कर बांध ले ! िफर उस कपडे को रोगी के कान से बांध दे ! बुखिार उतर जायगा ! 2. बचचे के उतम स्विास्थ्य वि दीघारयु के िलए : एक काला रेशमी डोरा ले ! “ ऊं नमोः भगविते विासुदेविाय नमः का जाप करते हिुए” उस डोरे मे थोडी थोडी दूरी पर सात गांठे लगाये ! उस डोरे को बचचे के गले या कमर मे बांध दे !
4. प्रतयेक मंगलविार को बचचे के िसर पर से कचचा दूध 11 बार विार कर िकसी जंगली कुते को शाम के समय िपला दे ! बचचा दीघारयु हिोगा ! 5. यिद िकसी को टायफाईड हिो गया हिो तो उसे प्रितिदन एक नािरयल पानी िपलाये ! कुछ हिी िदनों मे आराम हिो जायगा ! 6 ॰ िसनदूर लगे हिनुमान जी की मूितर का िसनदूर लेकर सीता जी के चरणों मे लगाएँ। िफर माता सीता से एक श्विास मे अपनी कामना िनविेिदत कर भिक्ति पूविरक प्रणाम कर विापस आ जाएँ। इस प्रकार कुछ िदन करने पर सभी प्रकार की बाधाओं का िनविारण हिोता हिै। रोगी को ठीक करने के िलए :- कृष्ण पक मे अमाविस्या की रात को 12 बजे धोकर नीले रंग के विस गहिण करे। आसन पर नीला कपड़ा िबछाकर पूविर की ओर मुखि करके बैठे। इसके पश्चात चौमुखिी दीपक ( चार मुँहि विाला जलाएँ। (िनमन सामगी पहिले से इकटठी करके रखि ले) नीला कपड़ा सविा गज 4 – मीटर चौमुखिी िदए 40 नग, िमटटी की गड़विी 1 नग, सफेद कुशासन( कुश का आसन) 1 नग, बितयाँ 51 नग, छोटी इलायची 11 दाने, छुहिारे (खिारक) 5 नग, एक नीले कपड़े का रूमाल, िदयासलाई, लौग 11 दाने, तेल सरसों 1 िकलो इत्र वि शीशी गुलाब के फूल 5 नग, गेरू का टुकड़ा, 1 लडडू और लडू के टुकड़े 11 नग। िवििध - नीले कपड़े के चारों कोने मे लडडू, लौग, इलायची एविं छुहिारे बाँध ले, िफर िमटटी के बतरन मे पानी भरकर, गुलाब के फूल भी विहिाँ रखि ले। िफर नीचे िलखिा मंत्र पढ़े। मंत्र पढ़ते समय लोहिे की चीज (िदयासलाई) से अपने चारों ओर लकीर खिींच ले। मंत्र इस प्रकार हिै। ऊँ अनुरािगनी मैथन िप्रये स्विाहिा। शुकलपके, जपे धाविनतावि दश्यते जपेत्।। यहि मंत्र चालीस िदन लगातार पढ़े, (सविा लाखि बार) सुबहि उठकर नदी के पानी मे अपनी छाया को देखिे। जब मंत्र संपूणर हिो जाएँ तो सारी सामगी (नीले कपड़े सिहित) पानी मे बहिा दे। अब िजसको आप अपने विश मे करना चाहिते हिै अथविा िजस िकसी रोगी का इलाज करना चाहिते हिै, उसका नाम लेकर इस मंत्र को 1100 बार पढ़े, बस
आपका काम हिो जाएगा। · यिद घर के छोटे बचचे पीिड़त हिों, तो मोर पंखि को पूरा जलाकर उसकी राखि बना ले और उस राखि से बचचे को िनयिमत रूप से ितलक लगाएं तथा थोड़ी- सी राखि चटा दे। · यिद बीमारी का पता नहिीं चल पा रहिा हिो और व्यिक्ति स्विस्थ भी नहिीं हिो पा रहिा हिो, तो सात प्रकार के अनाज एक- एक मुट्ठी लेकर पानी मे उबाल कर छान ले। छने वि उबले अनाज (बाकले) मे एक तोला िसंदूर की पुिड़या और ५० गाम ितल का तेल डाल कर कीकर (देसी बबूल) की जड़ मे डाले या िकसी भी रिविविार को दोपहिर १२ बजे भैरवि स्थल पर चढ़ा दे। · बदन ददर हिो, तो मंगलविार को हिनुमान जी के चरणों मे िसकका चढ़ाकर उसमे लगी िसंदूर का ितलक करे। · पानी पीते समय यिद िगलास मे पानी बच जाए, तो उसे अनादर के साथ फेके नहिीं, िगलास मे हिी रहिने दे। फेकने से मानिसक अशांित हिोगी कयोंिक पानी चंदमा का कारक हिै। 1. ससुराल मे सुखिी रहिने के िलए : 1- कनया अपने हिाथ से हिल्दी की 7 साबुत गांठे, पीतल का एक टुकड़ा और थोड़ा- सा गुड़ ससुराल की तरफ फेके, ससुराल मे सुरिकत और सुखिी रहिेगी। 2- सविा पावि मेहिंदी के तीन पैकेट ( लगभग सौ गाम प्रित पैकेट) बनाएं और तीनों पैकेट लेकर काली मंिदर या शस धारण िकए हिुए िकसी देविी की मूितर विाले मंिदर मे जाएं। विहिां दिकणा, पत्र, पुष्प, फल, िमठाई, िसंदूर तथा विस के साथ मेहिंदी के उक्ति तीनों पैकेट चढ़ा दे। िफर भगविती से कष िनविारण की प्राथरना करे और एक फल तथा मेहिंदी के दो पैकेट विापस लेकर कुछ धन के साथ िकसी िभखिािरन या अपने घर के आसपास सफाई करने विाली को दे। िफर उससे मेहिंदी का एक पैकेट विापस ले ले और उसे घोलकर पीिड़त मिहिला के हिाथों एविं पैरों मे लगा दे। पीिड़ता की पीड़ा मेहिंदी के रंग उतरने के साथ-साथ धीरे- धीरे समाप्त हिो जाएगी। पित-पतनी के बीच विैमनस्यता को दूर करने हिेतु : 1. रात को सोते समय पतनी पित के तिकये मे िसंदूर की एक पुिड़या और पित पतनी के तिकये मे कपूर की २ िटिकयां रखि दे। प्रातः हिोते हिी िसंदूर की पुिड़या घर से बाहिर फेक दे तथा कपूर को िनकाल कर उस कमरे जला दे। पित को विश मे करने के िलए :
1- यहि प्रयोग शुकल मे पक करना चािहिए ! एक पान का पता ले ! उस पर चंदन और केसर का पाऊडर िमला कर रखिे ! िफर दुगार माता जी की फोटो के सामने बैठ कर दुगार स्तुित मे से चँडी सोत का पाठ 43 िदन तक करे ! पाठ करने के बाद चंदन और केसर जो पान के पते पर रखिा था, का ितलक अपने माथे पर लगाये ! और िफर ितलक लगा कर पित के सामने जांय ! यिद पित विहिां पर न हिों तो उनकी फोटो के सामने जांय ! पान का पता रोज़ नया ले जो िक साबुत हिो कहिीं से कटा फटा न हिो ! रोज़ प्रयोग िकए गए पान के पते को अलग िकसी स्थान पर रखिे ! 43 िदन के बाद उन पान के पतों को जल प्रविाहि कर दे ! शीघ समस्या का समाधान हिोगा ! 2- शिनविार की राित्र मे ७ लौग लेकर उस पर २१ बार िजस व्यिक्ति को विश मे करना हिो उसका नाम लेकर फूंक मारे और अगले रिविविार को इनको आग मे जला दे। यहि प्रयोग लगातार ७ बार करने से अभीष व्यिक्ति का विशीकरण हिोता हिै। 3- अगर आपके पित िकसी अनय सी पर आसक्ति हिै और आप से लड़ाई- झगड़ा इतयािद करते हिै। तो यहि प्रयोग आपके िलए बहिुत कारगर हिै, प्रतयेक रिविविार को अपने घर तथा शयनकक मे गूगल की धूनी दे। धूनी करने से पहिले उस सी का नाम ले और यहि कामना करे िक आपके पित उसके चककर से शीघ हिी छूट जाएं। श्रद्धा-िविश्विास के साथ करने से िनिश्चय हिी आपको लाभ िमलेगा। 4- शुकल पक के प्रथम रिविविार को प्रातःकाल स्नानािद से िनविृत हिोकर अपने पूजन स्थल पर आएं। एक थाली मे केसर से स्वििस्तक बनाकर गंगाजल से धुला हिुआ मोती शंखि स्थािपत करे और गंध, अकत पुष्पािद से इसका पूजन करे। पूजन के समय गोघृत का दीपक जलाएं और िनमनिलिखित मंत्र का 1 माला जप स्फिटक की माला पर करे। श्रद्धा-िविश्विास पूविरक 1 महिीने जप करने से िकसी भी व्यिक्ति िविशेष का मोहिन-विशीकरण एविं आकषरण हिोता हिै। िजस व्यिक्ति का नाम, ध्यान करते हिुए जप िकया जाए विहि व्यिक्ति साधक का हिर प्रकार से मंगल करता हिै। यहि प्रयोग िनश्चय हिी कारगर िसद्ध हिोता हिै। मंत्र : ऊँ क्री विांिछतं मे विशमानय स्विाहिा।'' 5- िजन िसयों के पित िकसी अनय सी के मोहिजाल मे फंस गये हिों या आपस मे प्रेम नहिीं रखिते हिों, लड़ाई-झगड़ा करते हिों तो इस टोटके दारा पित को अनुकूल
बनाया जा सकता हिै। गुरविार अथविा शुक्रविार की राित्र मे १२ बजे पित की चोटी (िशखिा) के कुछ बाल काट ले और उसे िकसी ऐसे स्थान पर रखि दे जहिां आपके पित की नजर न पड़े। ऐसा करने से आपके पित की बुिद्ध का सुधार हिोगा और विहि आपकी बात मानने लगेगे। कुछ िदन बाद इन बालों को जलाकर अपने पैरों से कुचलकर बाहिर फेक दे। मािसक धमर के समय करने से अिधक कारगर िसद्ध हिोगा। पित पतनी मे कलेश दूर करने के िलए 1. श्री गणेश जी और शिक्ति की उपासना करे | 2. सोते समय पूविर की और िसरहिाना हिोना चािहिए | 3. चींिटयों को शककर डालना चािहिए | 4. भोजपत्र पर लाल कलम से पित का नाम िलखि कर तथा हिं हिनुमंते नमः ” ” का 21 बार उचचारण करे उसे शहिद मे अचछी तरहि से बंद कर के घर के िकसी कोने मे रखि दे जहिाँ पर िकसी की दिष न पढ़े | धीरे धीरे कलहिपूणर विाताविरण दूर हिोगा | कुछ पिरविारों मे सब कुछ हिोते हिुए भी छोटी छोटी बातो मे गृहि कलेश हिोता रहिता हिै | िनमन मंत्र का जाप पित या पतनी मे से कोई करे तो िकसी एक को बुिध आ जायेगी और घर मे शांित का विाताविरण बनेगा | मंत्र धं िधं धुम धुजरते | पतनी विां विीं बूम विािगधश्वििर | क्रं क्री क्रूं कािलका देविी | शं षीम शूं मे शुभम कुर | यिद लड़की यहि प्रयोग कर रहिी हिै तो पतनी की जगहि पित शबद का उलेख करे | – िवििध प्रातः स्नान कर के काली या माँ दुगार के िचत्र पर लाल पुष्प चढाये | घर की कलहि को समाप्त करने का उपाय रोजाना सुबहि जागकर अपने स्विर को देखिना चािहिये,नाक के बाये स्विर से जागने पर फ़ौरन िबस्तर छोड कर अपने काम मे लग जाना चािहिये,अगर नाक से दािहिना स्विर चल रहिा हिै तो दािहिनी तरफ़ बगल के नीचे तिकया लगाकर दुबारा से सो जाना चािहिये,कुछ समय मे बायां स्विर चलने लगेगा, सहिी तरीके से चलने पर िबस्तर छोड देना चािहिये।
पिरविार मे शांित बनाए रखिने के िलए : बुधविार को िमटी के बने एक शेर को उसके गले मे लाल चुनी बांधकर और लाल टीका लगाकर माता के मंिदर मे रखिे और माता को अपने पिरविार की सभी समस्याएं बताकर उनसे शांित बनाए रखिने की िविनती करे। यहि िक्रया िनष्ठापूविरक करे, पिरविार मे शांित कायम हिोगी। शादी िविविाहि मे िविघन न पडने देने के िलये टोटका शादी विाले िदन से एक िदन पहिले एक ईंट के ऊपर कोयले से "बाधाये" िलखिकर ईंट को उल्टा करके िकसी सुरिकत स्थान पर रखि दीिजये, और शादी के बाद उस ईंट को उठाकर िकसी पानी विाले स्थान पर डाल कर ऊपर से कुछ खिाने का सामान डाल दीिजये,शादी िविविाहि के समय मे बाधाये नहिीं आयेगी। 5. विैविािहिक सुखि के िलए : कनया का िविविाहि हिो जाने के बाद उसके घर से िविदा हिोते समय एक लोटे मे गंगाजल, थोड़ी सी हिल्दी और एक पीला िसकका डालकर उसके आगे फेक दे, उसका विैविािहिक जीविन सुखिी रहिेगा। शुक्र गहि की शािनत के गहिों मे शुक्र को िविविाहि वि विाहिन का कारक गहि कहिा गया हिै (इसिलये +विाहिन दुघरटना से बचने के िलये भी ये उपाय िकये जा सकते हिै. शुक्र के उपाय करने से विैविािहिक सुखि की प्रािप्त की संभाविनाएं बनती हिै. विाहिन से जुडे मामलों मे भी यहि उपाय लाभकारी रहिते हिै.
शुक्र की विस्तुओं से स्नान (Bathe Using the Products Related to Venus गहि की विस्तुओं से स्नान करना उपायों के अनतगरत आता हिै. शुक्र का स्नान उपाय करते समय जल मे बडी इलायची डालकर उबाल कर इस जल को स्नान
के पानी मे िमलाया जाता हिै (boil big cardamom in a water and mix in the bathing water). इसके बाद इस पानी से स्नान िकया जाता हिै. स्नान
करने से विस्तु का प्रभावि व्यिक्ति पर प्रतयक रप से पडता हिै. तथा शुक्र के दोषों का िनविारण हिोता हिै. यहि उपाय करते समय व्यिक्ति को अपनी शुद्धता का ध्यान रखिना चािहिए. तथा उपाय करने िक अवििध के दौरान शुक्र देवि का ध्यान करने से उपाय की शुभता मे विृै्िद्ध हिोती हिै. इसके दौरान शुक्र मंत्र का जाप करने से भी शुक्र के उपाय के
फलों को सहियोग प्राप्त हिोता हिै (recite Mantra at the time of bathing).
शुक्र की विस्तुओं का दान -Donate Products related to Venus
शुक्र की दान देने विाली विस्तुओं मे घी वि चाविन (Ghee and rice are the products of Venus) का दान िकया जाता हिै. इसके अितिरक्ति शुक्र कयोिक भोग-िविलास के कारक गहि हिै. इसिलये सुखि- आराम की विस्तुओं का भी दान
िकया जा सकता हिै. बनावि -श्रंगार की विस्तुओं का दान भी इसके अनतगरत िकया
जा सकता हिै (cosmetics and luxurious products). दान िक्रया मे दान
करने विाले व्यिक्ति मे श्रद्धा वि िविश्विास हिोना आविश्यक हिै. तथा यहि दान व्यिक्ति को अपने हिाथों से करना चािहिए. दान से पहिले अपने बडों का आिशविारद लेना उपाय की शुभता को बढाने मे सहियोग करता हिै.
शुक्र मनत्र का जाप (Enchantment of Venus's Mantra)
शुक्र के इस उपाय मे िनमन श्लोक का पाठ िकया जाता हिै. " ऊँ जयनती मंगला काली भदकाली दुगार कमा िशविा धात्री स्विाहिा स्विधा " शुक्र के अशुभ गोचर की अवििध या िफर शुक्र की दशा मे इस श्लोक का पाठ प्रितिदन या िफर शुक्रविार के िदन करने पर इस समय के अशुभ फलों मे कमी हिोने की संभाविना बनती हिै. मुंहि के अशुद्ध हिोने पर मंत्र का जाप नहिीं करना चािहिए. ऎसा करने पर िविपरीत फल प्राप्त हिो सकते हिै. विैविािहिक जीविन की परेशािनयों को दूर करने के िलये इस श्लोक का जाप करना लाभकारी रहिता हिै (recite this Mantra to resolve married life problems). विाहिन दुघरटना से बचावि
करने के िलये यहि मंत्र लाभकारी रहिता हिै. शुक्र का यनत्र (Yantra of Venus) शुक्र के अनय उपायों मे शुक्र यनत्र का िनमारण करा कर उसे पूजा घर मे रखिने पर लाभ प्राप्त हिोता हिै. शुक्र यनत्र की पहिली लाईन के तीन खिानों मे 11,6,13 ये
संखयाये िलखिी जाती हिै. मध्य की लाईन मे 12,10, 8 संखया हिोनी चािहिए. तथा अनत की लाईन मे 07,14,9 संखया िलखिी जाती हिै. शुक्र यनत्र मे प्राण प्रितष्ठा करने के िलये िकसी जानकार पिणडत की सलाहि ली जा सकती हिै. यनत्र पूजा घर मे स्थािपत करने के बाद उसकी िनयिमत रप से साफ-सफाई का ध्यान रखिना चािहिए. शादी करने का अनुभूत उपाय पुरषों को िवििभन रंगों से िसयों की तस्विीरे और मिहिलाओं को लाल रंग से पुरषों की तस्विीर सफ़ेद कागज पर रोजाना तीन मिहिने तक एक एक बनानी चािहिये। अगर लड़की की उम िनकली जा रहिी हिै और सुयोगय लड़का नहिीं िमल रहिा। िरश्ता बनता हिै िफर टूट जाता हिै। या िफर शादी मे अनाविश्यक देरी हिो रहिी हिो तो कुछ छोटे-छोटे िसद्ध टोटकों से इस दोष को दूर िकया जा सकता हिै। ये टोटके अगर पूरे मन से िविश्विास करके अपनाए जाएं तो इनका फल बहिुत हिी कम समय मे िमल जाता हिै। जािनए कया हिै ये टोटके :-1. रिविविार को पीले रंग के कपड़े मे सात सुपारी, हिल्दी की सात गांठे, गुड़ की सात डिलयां, सात पीले फूल, चने की दाल (करीब 70 गाम), एक पीला कपड़ा (70 सेमी), सात पीले िसकके और एक पंदहि का यंत्र माता पाविरती का पूजन करके चालीस िदन तक घर मे रखिे। िविविाहि के िनिमत मनोकामना करे। इन चालीस िदनों के भीतर हिी िविविाहि के आसार बनने लगेगे। 2. लड़की को गुरविार का वत करना चािहिए। उस िदन कोई पीली विस्तु का दान करे। िदन मे न सोए, पूरे िनयम संयम से रहिे। 3. साविन के महिीने मे िशविजी को रोजाना िबल्वि पत्र चढ़ाए। िबल्वि पत्र की संखया 108 हिो तो सबसे अचछा पिरणाम िमलता हिै। 4. िशविजी का पूजन कर िनमारल्य का ितलक लगाए तो भी जल्दी िविविाहि के योग बनते हिै।
िविविाहि के उपाय (Remedies and Upay to avoide late marriage)
समय पर अपनी िजममेदािरयों को पूरा करने की इचछा के कारण माता-िपता वि भाविी विर- विधू भी चाहिते हिै िक अनुकुल समय पर हिी िविविाहि हिो जाये. कुणडली मे
भी कहिीं बनती नहिीं हिै. इस प्रकार की िस्थित हिोने पर शीघ िविविाहि के उपाय करने िहितकारी रहिते हिै. उपाय करने से शीघ िविविाहि के मागर बनते हिै. तथा िविविाहि के
मागर की बाधाएं दूर हिोती हिै.
उपाय करते समय ध्यान मे रखिने योगय बाते (Precautions while doing Jyotish remedies) 1. िकसी भी उपाय को करते समय, व्यिक्ति के मन मे यहिी िविचार हिोना चािहिए, िक विहि जो भी उपाय कर रहिा हिै, विहि ईश्विरीय कृै्पा से अविश्य हिी शुभ फल देगा. 2. सभी उपाय पूणरत: साितविक हिै तथा इनसे िकसी के अिहित करने का िविचार नहिीं हिै. 3. उपाय करते समय उपाय पर हिोने विाले व्ययों को लेकर िचिनतत नहिीं हिोना चािहिए. 4. उपाय से संबिनधत गोपनीयता रखिना िहितकारी हिोता हिै. 5. यहि मान कर चलना चािहिए, िक श्रद्धा वि िविश्विास से सभी कामनाएं पूणर हिोती हिै. आईये शीघ िविविाहि के उपायों को समझने का प्रयास करे (Remedies for a late marriage) 1. हिल्दी के प्रयोग से उपाय िविविाहि योग लोगों को शीघ िविविाहि के िलये प्रतयेक गुरविार को नहिाने विाले पानी मे एक चुटकी हिल्दी डालकर स्नान करना चािहिए. भोजन मे केसर का सेविन करने से िविविाहि शीघ हिोने की संभाविनाएं बनती हिै. 2. पीला विस धारण करना ऎसे व्यिक्ति को सदैवि शरीर पर कोई भी एक पीला विस धारण करके रखिना चािहिए. 3. विृै्द्धो का सममान करना उपाय करने विाले व्यिक्ति को कभी भी अपने से बडों वि विृै्द्धों का अपमान नहिीं करना चािहिए. 4. गाय को रोटी देना िजन व्यिक्तियों को शीघ िविविाहि की कामना हिों उनहिे गुरविार को गाय को दो आटे के पेडे पर थोडी हिल्दी लगाकर िखिलाना चािहिए. तथा इसके साथ हिी थोडा सा गुड वि चने की पीली दाल का भोग गाय को लगाना शुभ हिोता हिै. 5. शीघ िविविाहि प्रयोग