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WRITER JAI MAA KAALI
ितलो तमा अ सरा की िगनती भी े ठ अ सराओं मे होती ह। यह अ सरा प्र यक्ष और अप्र यक्ष दोनो ही प मे साधक की सहायता करती रहती ह। यह साधना अनुभुत ह। इस साधना को करने से सभी सुखो की प्राि त होती ह। इस साधना को शु करते ही एक – दो िदन म धीमी धीमी खुशबू का प्रवाह होने लगता ह। यह खुशबू ितलो तमा के सामने होने की पूवर् सुचना ह। अ सरा का प्र यक्षीकरण एक मसा य कायर् ह। मेहनत बहुत ही ज री ह। एक बार अ सरा के प्र यक्षीकरण के बाद कुछ भी दुलर्भ नहीं रह जाता, इसमे कोई दोराय नहीं ह। यह प्रिक्रया आपकी सेवा म प्र तुत करने की कोिशश करता हूँ। सामा यतः अ सरा साधना भी गोपनीयता की े णी म आती ह। सभी को इस प्रकार की साधना जीवन मे एक बार िसद्ध करने की पुरी कोिशश करनी चािहए क्य िक किलयुग म जो भी कुछ चािहए वो सब इस प्रकार की साधना से सहज ही प्रा त िकया जा सकता ह। इन साधनाओं की अ छी बात यह ह िक इन साधनाओं को साधारण यिक्त भी कर सकता ह मतलब उसको को पंिडत तांित्रक बनाने की कोई अव यकता नहीं ह। साधक नान कर ले अगर नही भी कर सको तो हाथ-मुहँ अ छी तरह धौकर, धुले व त्र V isitor
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क्या आप भी साधना करना चाहते ह? तो आज ही अपने गु से स पकर् कर िकसी साधना की शु वात कर।
पहनकर, रात मे ठीक 10 बजे के बाद साधना शु कर। रोज़ िदन मे एक बार नान करना ज री है। मंत्र जाप मे क बल का आसन रखे और अ सरा और त्री के प्रित स मान आदर होना चािहए। अ सरा , गु , धािमर्क ग्रंथो और िविध मे पुणर् िव वास होना चािहए, नहीं तो सफलत होना मुि कल ह। अिव वास का साधना मे कोई थान नही है। साधना का समय एक ही रखने की कोिशश करनी चािहए। एक टील की लेट मे सारी सामग्री रख ले। साधना करते समय और मंत्र जप करते समय जमीन को पशर् नही करते। माला को लाल या िकसी अ य रंग के कपडे से ढककर ही मंत्र जप करे या गौमुखी खरीदे ले। मंत्र जप को अगुँठा और मा यमा से ही करे । मंत्र जपते समय माला मे जो अलग से एक दान लगा होता ह उसको लांघना नहीं है मतलब ज प नहीं करना ह। जब दुसरी माला शु हो तो माला के आिखए दाने/मनके को पहला दान मानकर जप कर, इसके िलए आपको माला को अंत मे पलटना होगा। इस िक्रया का बैठकर पहले से अ यास कर ल। पूजा सामग्री:- िस दुर, चावल, गुलाब पु प, चौकी, नैवैध, पीला आसन, धोती या कुतार् पेजामा, इत्र, जल पात्र मे जल, च मच, एक टील की थाली, मोली/कलावा, अगरब ती,एक साफ कपडा बीच बीच मे हाथ पोछने के िलए, देशी घी का दीपक, (च दन, केशर, कु कुम, अ टग ध यह सभी ितलक के िलए)) िविध : पूजन के िलए नान आिद से िनवृ त होकर साफ-सुथरे आसन पर पूवर् या उ तर िदशा म मुंह करके बैठ जाएं। पूजन सामग्री अपने पास रख ल। बाय हाथ मे जल लेकर, उसे दािहने हाथ से ढ़क ल। मंत्रो चारण के साथ जल को िसर, शरीर और पूजन सामग्री पर िछड़क ल या पु प से अपने को जल से िछडके। ————————————————————————————————— ॐ अपिवत्रः पिवत्रो वा सवार्व थां गतोऽिप वा। यः मरेत् पु डरीकाक्षं स बा या य तरः शुिचः॥ ————————————————————————————————— (िन निलिखत मंत्र बोलते हुए िशखा/चोटी को गांठ लगाये / पशर् करे) ॐ िचद्रूिपिण महामाये! िद यतेजःसमि वते। ित ठ देिव! िशखाम ये तेजोवृिद्धं कु व मे॥ ————————————————————————————————— (अपने माथे पर कुंकुम या च दन का ितलक कर) ॐ च दन य मह पु यं, पिवत्रं पापनाशनम ्। आपदां हरते िन यं, ल मीि त ठित सवर्दा॥ ————————————————————————————————— (अपने सीधे हाथ से आसन का कोना जल/कु कुम थोडा डाल दे) और कहे ॐ पृ वी! वया धृता लोका देिव! वं िव णुना धृता। वं च धारय मां देिव! पिवत्रं कु चासनम्॥ ————————————————————————————————— संक प:- दािहने हाथ मे जल ले। म ...अमुक... गोत्र मे ज मा,... यहाँ आपके िपता का नाम... ... का पुत्र ...यहाँ आपका नाम..., िनवासी...आपका पता... आज सभी देवी-दे ताओं को साक्षी मानते हुए देवी ितलो मा अ सरा की पुजा, ग पित और गु जी की पुजा देवी ितलो मा अ सरा के साक्षात दशर्न की अिभलाषा और प्रेिमका प मे प्राि त के िलए कर रहा हूँ िजससे देवी ितलो मा अ सरा प्रस न होकर दशर्न दे और मेरी आज्ञा का पालन करती रह साथ ही साथ मुझे प्रेम, धन धा य और सुख प्रदान कर। जल और सामग्री को छोड़ दे। ————————————————————————————————— गणपित का पूजन कर। ॐ गु ब्रर् मा गु िवर् णुः गु दवो महे वरः। गु ः साक्षात पर ब्र म त मै ीगुरवे नमः ॥ ॐ ी गु चरणकमले यो नमः। ॐ ी गुरवे नमः। आवाहयािम, थापयािम, यायािम। गु पुजन कर ल कम से कम गु मंत्र की चार माला कर या जैसा आपके गु का आदेश हो। सवर् मंगल मांग ये िशवे सवार्थर्सािधके। शर ये त्रयंबके गौरी नारायिण नमोअ तुते ॐ ी गाय यै नमः। ॐ िसिद्ध बुिद्धसिहताय ीम महागणािधपतये नमः। ॐ ल मीनारायणा यां नमः। ॐ उमामहे वरा यां नमः। ॐ वाणीिहर यगभार् यां नमः। ॐ शचीपुर दरा यां नमः। ॐ सव यो देवे यो नमः। ॐ सव यो ब्रा मणे यो नमः। ॐ भ्रं भैरवाय नमः का 21 बार जप कर ले। —————————————————————————————————
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Apsara Sadhana Mantra Tantra Yantra --> According to Hindu
Religion, Nymph lives in heaven, skilled in many arts, stunning and supernatural divine feminine....
(अ सरा का प व अ सरा साधना के िनयम) Apsara --> अ सराये अ यंत सुंदर और जवान होती ह. उनको सुंदरता और शिक्त िवरासत म िमली है. वह गुलाब का इत्र और चमेली आिद की गंध पस... Celestial Nymph Rambha Apsara (र भा अ सरा साधना) --> र भा अ सरा साधना करना जीवन मे अपने आप मे सौभाग्य ह इस साधना से जीवन मे हर प्रकार की खुशी आती है। भौितकवादी दुिनय... धन प्रदायक अचूक उपाय (For Wealth) भगवान ी गणेश प्रखर बुिद्ध के वामी ह। यह िवघ्रहतार् है। भुत प्रेत आिद इनकी सेवा करते ह। ी गणेश जी की पुजा के करण िशव गण भी प्रस... बीज मंत्र की मिहमा (Beej Mantra) मंत्र शा त्र म बीज मंत्र का िवशेष थान है। मंत्र म भी इ ह िशरोमिण माना जाता है क्य िक िजस प्रकार बीज से पौध और वृक्ष की उत...
अब अ सरा का यान कर और सोचे की वो आपके सामने ह। दोनो हाथो को िमलाकर और फैलाकर कुछ नमाज पढने की तरफ बना लो। साथ ही साथ “ॐ ीं ीं क्लीं ीं ितलो मा अ सरा आग छ आग छ वाहा”मंत्र का 21 बार उचारण करते हुए एक एक गुलाब थाली मे चढाते जाये। अब सोचो िक अ सरा आ चुकी ह। हे सु दरी तुम तीनो लोक को मोहने वाली हो तु हारी देह गोरे गोरे रंग के कारण अतयंत चमकती हुई ह। तुम न अनेको अनोखे अनोखे गहने पहने हुये और बहुत ही सु दर और अनोखे व त्र को पहना हुआ ह। आप जैसी सु दरी अपने साधक की सम त मनोकामना को पुरी करने मे जरा सी भी देरी नही करती। ऐसी िविचत्र सु दरी ितलो तमा अ सरा को मेरा कोिट कोिट प्रणाम। ————————————————————————————————— इन गुलाबो के सभी ग ध से ितलक करे। और वयँ को भी ितलक कर ल। ॐ अपूवर् सौ दयायै, अ सरायै िसद्धये नमः। मोली/कलवा चढाये : व त्रम ् समपर्यािम ॐ ितलो मा अ सरायै नमः गुलाब का इत्र चढाये : ग धम समपर्यािम ॐ ितलो मा अ सरायै नमः िफर चावल (िबना टुटे) : अक्षतान ् समपर्यािम ॐ ितलो मा अ सरायै नमः पु प : पु पािण समपर्यािम ॐ ितलो मा अ सरायै नमः अगरब ती : धूपम ् आघ्रापयािम ॐ ितलो मा अ सरायै नमः दीपक (देशी घी का) : दीपकं दशर्यािम ॐ ितलो मा अ सरायै नमः िमठाई से पुजा कर।: नैवे यं िनवेदयािम ॐ ितलो मा अ सरायै नमः िफर पुजा साम त होने पर सभी िमठाई को वयँ ही ग्रहण कर ल। ————————————————————————————————— पहले एक मीठा पान (पान, इलायची, ल ग, गुलाक द का) अ सरा को अि तर् करे और वयँ खाये। इस मंत्र की फािटक की माला से 21 माला जपे और ऐसा 11 िदन करनी ह। ॐ क्लीं ितलो मा अ सरायै मम व मनाय क्लीं फट ————————————————————————————————— यहाँ देवी को मंत्र जप समिपर्त कर द। क्षमा याचना कर सकते ह। जप के बाद मे यह माला को पुजा थान पर ही रख दे◌ं। मंत्र जाप के बाद आसन पर ही पाँच िमनट आराम कर। ॐ गु ब्रर् मा गु िवर् णुः गु दवो महे वरः। गु ः साक्षात पर ब्र म त मै ीगुरवे नमः ॥ ॐ ी गु चरणकमले यो नमः।
Menka Rambha with Urvashi Apsara Sadahna ॐ अनंग मन थाये ऐं क्लीं िन य िक्ल न मदद्रवे वाहा OM ANANG MANMTHAAYAE AYEIM KLEEM NITYAE KLINN MADDR... साधना के िनयम िकसी भी साधना म सबसे मह वपुणर् भाग उसके िनयम ह. सामा यता सभी साधना म एक जैसे िनयम होते ह. परतुं म यहाँ पर िवशेष तौर पर यक्ष... Tilottama Kanchanmala Ratanmala Apsara Sadhana I promise you if you
once seen an Apsara you will never forget her even after death. If you are in search of such divine beauty, then th... कृपा नोट कर िक एक से यादा िलंक एक साथ खोलने के िलए, कीबोडर् पर Control Key दबाये और साथ साथ माउस से िक क कर। Blog A rchive ▼ 2013 (9) ▼ May (1)
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यिद कर सके तो पहले की भांित पुजन कर और अंत मे पुजन गु को समिपर्त कर दे। अंितम िदन जब अ सरा दशर्न दे तो िफर िमठाई इत्र आिद अिपर्त करे और प्रस न होने पर अपने मन के अनुसार वचन लेने की कोिशश कर सकते ह। पुजा के अंत मे एक च मच जल आसन के नीचे ज र डाल द और आसन को प्रणाम कर ही उठ। ॥ हिर ॐ त सत ॥ ————————————————————————————————— िनयम िजनका पालन अिधक से अिधक इस साधना मे करना चािहए वो सब नीचे िलखे ह। ब्र मचरी रहना परम ज री होता ह अगर कुछ िवचारना ह तो केवल अपने ई ट का या ॐ नमः िशवाय या अ सरा का यान कर, आप सदैव यह सोचे िक वो सु दर सी अ सरा आपके पास ही मौजुद ह और आपको देख रही ह। ऐसी अव था मे क्या शोभनीय ह आप वयँ अ दाजा लगा सकते ह। भोजन: मांस, शराब, अ डा, नशे, त बाकू, तामिसक भोजन आिद सभी से यादा से यादा दुर रहना ह। इनका प्रयोग मना ही ह। केवल साि वक भोजन ही कर क्य िक यह काम भावना को भडकाने का काम करते ह। मंत्र जप के समय कृपा करके नीं , आल य, उबासी, छींक, थूकना, डरना, िलंग को हाथ लगाना, सेल फोन को पास रखना, जप को पहले िदन िनधािरत संख्या से कम- यादा जपना, गा-गा कर जपना, धीमे-धीमे जपना, बहुत् ही यादा तेज-तेज जपना, िसर िहलाते रहना, वयं िहलते रहना, मंत्र को भुल जाना (पहले से याद नहीं िकया तो भुल जाना), हाथ-पर फैलाकर जप करना यह सब कायर् मना ह। मेरा मतलब ह िक बहुत ही ग भीरता से मंत्र जप करना ह। यिद आपको पैर बदलने की ज रत हो तो माला पुरी होने के बाद ही पैर को बदल सकते ह या थोडा सा आराम कर सकते ह लेिकन मंत्र जप ब द ना कर। यिद आपको िसिद्ध चािहए तो भगवन ी िशव शंकर भगवान के कथन को कभी ना भुलना िक "िजस साधक की िज हा परा न (दुसरे का भोजन खाना) से जल गयी हो, िजसका मन म पर त्री (अपनी पि न के अलावा कोई भी) हो और िजसे िकसी से प्रितशोध लेना हो उसे भला केसै िसिद्ध प्रा त हो सकती ह"। यिद उसे एक बार भी प्रेिमका की तरह प्रेम/पुजा िकया तो आने मे कभी देरी नही करती है। साधना के समय वो एक देवी मात्र ही ह और आप साधक ह। इनसे सदैव आदर से बात करनी चािहए। सम त अ सराएँ वाक िसद्ध होती ह। िकसी भी साधना को सीधे ही करने नही बैठना चािहए। उससे पहले आपको अपना कुछ अ यास करना चािहए। मंत्रो का उचारण कैसे करना है यह भी जान लेना चािहए और बार बार बोलकर अ यास कर लेना चािहए। ऐसा करने पर अ सरा ज र िसंद्ध होती ह बाकी जो देवी कािलका की इ छा क्य िक होता वही ह जो देवी जगत जननी चाहती ह। साधना से िकसी को नुकसान पहुँचाने पर साधना शिक्त वयँ ही समा त होने लगती ह। इसिलए अपनी साधना की रक्षा करनी चािहए। िकसी को अपनी शिक्त का प्रदशर्न करने की ज रत नहीं ह। यहाँ कोई िकसी के काम नहीं आता ह लेिकन िफर भी कभी कभार िकसी ना िकसी जो बहुत ही ज रत म द हो की सहायता करी जा सकती ह। वैसे यह साधना साधक का ही यादा भला करने वाले ह। म तो इतना ही कहुगाँ िक इस साधना को नए साधक और ऐसे आदमी को ज र करना चािहए जो देवी देवता मे यकीन ना रखता हो। यिद ऐसे लोग थोडा सा िव वास करके भी इस साधना को करते ह तो उ ह कुछ ना कुछ अ छे पिरणाम ज र िमलने चािहए। यिद िकसी को साधना करने मे कोई िदक्कत हो रही ह तो हमसे भी स पकर् (ईमेल का पता सबसे उपर िदया गया ह) िकया जा सकता ह। यिद पहली बार म साधना मे िसिद्ध प्रा त नहीं हो रही है तो आप सहायता के िलए ईमेल कर सकते ह। देवी माँ आपको सभी िसिद्ध प्रदान कर इस कामना के साथ इस लेख को िवराम देता हूँ।
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3 comments:
Lotakhota
May 31, 2013 at 9:28 AM
this sadhana is very good and easy thanks for this sadhana
Sri Ram
June 1, 2013 at 5:06 AM
All the posts which guru enlighting in this blog are precious and rare..thanks a lottt ~JAI GURUDEV~
Jai Maa Kaali
June 3, 2013 at 5:46 PM आप सब इस साधना को कर इससे आपका भ्रम दुर हो जायेगा!!!! िनकट भिव य मे यह पो ट यहाँ से हटा दी जायेगी। Post a Comment अगर आप अपनी सम या की शीघ्र समाधान चाहते ह तो ईमेल ही कर!! Comment as: Older Post »
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Panchang
Time: 3:08 Date: 9 Jun 2013
Moon:26 46'27" Vrushabha Day:Sunday Tithi:1. Padyami Frm: 8.06.2013 21:27 To: 9.06.2013 23:56 Nakshtram:5. Mrugasira Frm: 8.06.2013 20:09 To: 9.06.2013 23:12 Karanam:11. Kimstughana Frm: 8.06.2013 21:27 To: 9.06.2013 10:41 Yogamu:9. Soola Frm: 8.06.2013 19:02 To: 9.06.2013 20:04 Ayanamsa: 24 2'55"
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जो सफल ह वो पहले कभी ना कभी असफल ही होगा। हम सब की कायर् क्षमता लगभग िमलती-जुलती ही ह। अंतर इस बात का ह िक िकतनी ज दी हम अपनी हार वीकार कर लेते है! िबना प्रयास िकए अपनी हार मनाना िकतना ठीक ह यह आप सब जानते है। यिद कोई हमारी बातो से सहमत नही ह या इन सब साधनाओ से सहमत नहीं ह तो म उनसे मेरी प्राथर्ना ह िक आप यह सब बात दादी जी वारा सुनाई गयी परीय की कहानीयाँ ही समझे।
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