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हहॊदी व्माकयण का ननभााण एवॊ चुनौनिमाॉ
मुनेश कुमारी
सार
जिस विद्या से ककसी भाषा के बोऱने तथा लऱखने के ननयमों की व्यिजथथत ऩद्धनत का ज्ञान होता है, उसे 'व्याकरण' कहते हैं। व्याकरण िह विधा है, जिसके द्िारा ककसी भाषा का शुद्ध बोऱना या लऱखना िाना िाता है। व्याकरण भाषा की व्यिथथा को बनाये रखने का काम करते हैं। व्याकरण, भाषा के शुद्ध एिॊ अशुद्ध प्रयोगों ऩर ध्यान देता है। प्रत्येक भाषा के अऩने ननयम होते हैं, उस भाषा का व्याकरण भाषा को शुद्ध लऱखना ि बोऱना लसखाता है।
मनुष्य मौखखक एिॊ लऱखखत भाषा में अऩने विचार प्रकट कर सकता है और करता रहा है ककन्तु इससे भाषा का कोई ननजचचत एिॊ शुद्ध थिरूऩ जथथर नहीॊ हो सकता। भाषा के शुद्ध और थथायी रूऩ को ननजचचत करने के लऱए ननयमबद्ध योिना की आिचयकता होती है और उस ननयमबद्ध योिना को हम व्याकरण कहते हैं।
ऩररभाषा
व्माकयण वह शास्त्र है जजसके द्वाया ककसी बी बाषा के शब्देआ औय वाक्मेआ के शुद्ध स्त्वरूऩेआ एवॊ शुद्ध प्रमोगेआ का ववशद ऻान कयामा जािा है।
भाषा और व्याकरण का सॊबॊध
कोई बी भनुष्म शुद्ध बाषा का ऩूणा ऻान व्माकयण के बफना प्राप्ि नहीॊ कय सकिा। अि् बाषा औय व्माकयण का घननष ्ठ सॊफॊध हेऄ वह बाषा भें उच्चायण, शब्द-प्रमोग, वाक्म-गठन िथा अथों के प्रमोग के रूऩ को ननजचचि कयिा है। व्माकयण के ववबाग- व्माकयण के िीन अॊग ननधाारयि ककमे गमे हेऄ-
1. वणा ववचाय- इसभे वणों के उच्चायण, रूऩ, आकाय, बेद आहद के सम्फन्ध भें अध्ममन होिा है। 2. शब्द ववचाय- इसभें शब्देआ के बेद, रूऩ, प्रमोगेआ िथा उत्ऩजत्ि का अध्ममन ककमा जािा है।
3. वाक्म ववचाय- इसभे वाक्म ननभााण, उनके प्रकाय, उनके बेद, गठन, प्रमोग, ववग्रह आहद ऩय ववचाय ककमा जािा है।
भाषा, व्याकरण और बोऱी
35 सॊसाय भें अनेक बाषाएॉ हेऄ। जैसे-हहन्दी,सॊस्त्कृि,अॊग्रेजी, फॉगरा,गुजयािी,ऩॊजाफी,उदूा, िेरुगु, भरमारभ, कन्नड़, फ्रेऄच, चीनी, जभान इत्माहद।बाषा के प्रकाय- बाषा दो प्रकाय की होिी है-
1. मौखखक भाषा। 2. लऱखखत भाषा।
मौखखक भाषा आभने-साभने फैठे व्मजक्ि ऩयस्त्ऩय फािचीि कयिे हेऄ अथवा कोई व्मजक्ि बाषण आहद द्वाया अऩने ववचाय प्रकट कयिा है िो उसे बाषा का भौखिक रूऩ कहिे हेऄ।
लऱखखत भाषा जफ व्मजक्ि ककसी दूय फैठे व्मजक्ि को ऩर द्वाया अथवा ऩुस्त्िकेआ एवॊ ऩर-ऩबरकाओॊ भें रेि द्वाया अऩने ववचाय प्रकट कयिा है िफ उसे बाषा का भरखिि रूऩ कहिे हेऄ।
व्याकरण
भनुष्म भौखिक एवॊ भरखिि बाषा भें अऩने ववचाय प्रकट कय सकिा है औय कयिा यहा है ककन्िु इससे बाषा का कोई ननजचचि एवॊ शुद्ध स्त्वरूऩ जस्त्थय नहीॊ हो सकिा। बाषा के शुद्ध औय स्त्थामी रूऩ को ननजचचि कयने के भरए ननमभफद्ध मोजना की आवचमकिा होिी है औय उस ननमभफद्ध मोजना को हभ व्माकयण कहिे हेऄ।ऩरयबाषा- व्माकयण वह शास्त्र है जजसके द्वाया ककसी बी बाषा के शब्देआ औय वाक्मेआ के शुद्ध स्त्वरूऩेआ एवॊ शुद्ध प्रमोगेआ का ववशद ऻान कयामा जािा है।
बाषा औय व्माकयण का सॊफॊध- कोई बी भनुष्म शुद्ध बाषा का ऩूणा ऻान व्माकयण के बफना प्राप्ि नहीॊ कय सकिा। अि् बाषा औय व्माकयण का घननष्ठ सॊफॊध हेऄ वह बाषा भें उच्चायण, शब्द-प्रमोग, वाक्म-गठन िथा अथों के प्रमोग के रूऩ को ननजचचि कयिा है।व्माकयण के ववबाग- व्माकयण के चाय अॊग ननधाारयि ककमे गमे हेऄ-
1. वणा-ववचाय।
2. शब्द-ववचाय।
3. ऩद-ववचाय।
4. वाक्म ववचाय।
िणण-विचार
36 उच्चायण ऩऺ से होिा है, वहीीँ वणों का सम्फन्ध रेिन ऩऺ से। हहन्दी बाषा भेँ सम्ऩूणा वणों के सभूह को ‘वणाभारा’ कहिे हेः। हहन्दी वणाभारा भे 44 वणा हेऄ जजसभें 11 स्त्वय एवॊ 33 व्मॊजन हेऄ।
स्त्वय वे वणा हेऄ जजनका उच्चायण कयिे सभम वामु बफना ककसी अवयोध मा रूकावट के भुि से फाहय ननकरिी है। स्त्वय 11 हेऄ– अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ। मद्मवऩ ‘ऋ’ को भरखिि रूऩ भें स्त्वय भाना जािा है ककन्िु आजकर हहन्दी भें इसका उच्चायण ‘रय’ के सभान होिा है। इसभरए ‘ऋ’ को स्त्वयेआ की श्रेणी भें सजम्भभरि नहीीँ ककमा गमा है। अॊग्रेजी के प्रबाव से ‘ऑ’ ध्वनन का हहन्दी भेँ सभावेश हो चुका है। मह हहन्दी के ‘आ’ िथा ‘ओ’ के फीच की ध्वनन है।
शब्द विचार हहॊदी व्माकयण का दूसया िॊड है जजसके अॊिगाि शब्द की ऩरयबाषा, बेद-उऩबेद, सॊचध, ववच्छेद, रूऩाॊियण, ननभााण आहद से सॊफॊचधि ननमभेआ ऩय ववचाय ककमा जािा है।
ऩद-विचार। साथाक वणा मा वणोँ के सभूह को शब्द कहा जािा है। शब्द साभबप्राम होिे हेः। जफ कोई साथाक शब्द वाक्म भेँ प्रमुक्ि होिा है िफ उसे ‘ऩद’ कहिे हेः। व्माकयण के ननमभेअ के अनुसाय ववबजक्ि, वचन, भरॉग, कार आहद की मोग्मिा यिने वारा वणोँ का सभूह ‘ऩद’ कहरािा है। जैसे– याभ ववद्मारम जामेगा। मह वाक्म ‘याभ’, ‘ववद्मारम’ औय ‘जामेगा’ िीन ऩदेअ से फना है।
िाक्य विचार। साथाक ऩदेअ (शब्देअ) के उस सभूह को वाक्म कहिे हेः, जजसके द्वाया एक अथा मा एक ऩूणा बाव की अभबव्मजक्ि होिी है। वाक्म साथाक शब्देअ का व्मवजस्त्थि रूऩ है। भशक्षऺिेअ की वाक्म–यचना व्माकयण के ननमभेअ से अनुशाभसि होिी है।
वाक्म एक मा एक से अचधक शब्देअ का बी हो सकिा है। बाषा की इकाई वाक्म है। छोटा फारक चाहे वह एक शब्द ही फोरिा हो, उसका अथा ननकरिा है, िो वह वाक्म है। वाक्म–यचना भेँ प्रमुक्ि साथाक ऩदेअ के सभूह भेँ ऩयस्त्ऩय मोग्मिा, आकाॊऺा औय आसजक्ि मा ननकटिा का होना जरूयी है, िबी वह साथाक ऩद–सभूह वाक्म कहरािा है।
हहॊदी व्याकरण चुनौनतयाॉ
37 इस भानभसकिा की आधाय बूभभ ऩय जफ साहहत्म यचना की ओय भुड़िा है िो हहन्दी बषा, व्माकयण औय वऩॊगर का अधकचया ऻान औय हहन्दी को हेम भानने की प्रवृजत्ि उसे उदूा की ओय उन्भुि कय देिी है जफकक उदूा स्त्वमॊ हहन्दी की अयफी-पायसी शब्द फाहुल्मिा की ववशेषिा सभेटे शैरी भार है।
गि कुछ हदननॊ से एक औय चचॊिनीम प्रवृजत्ि उबयी है। याजनैनिक नेिाओॊ ने भिेआ को हड़ऩने के भरमे आॊचभरक फोभरमेआ (जो हहन्दी की शैरी ववशेष हेऄ) को प्रान्िेआ की याज बाषा घोवषि कय उन्हें हहन्दी का प्रनिस्त्ऩधी फनाने का कुप्रमास ककमा है। अॊियजार (नेट) ऩय बी ऐसी कई साइटें हेऄ जहाॉ इन फोभरमेआ के ऩऺधय जाने-अनजाने हहन्दी ववयोध िक ऩहुॉच जािे हेऄ जफकक वे जानिे हेऄ कक ऺेर ववशेष के फाहय फोभरओॊ की स्त्वीकृनि नहीॊ हो सकिी।
भेऄने इस के वेरुद्ध यचनात्भक प्रमास ककमा औय िड़ी हहन्दी के साथ उदूा, फृज, अवधी, बोजऩुयी, ननभाड़ी, भारवी, भायवाड़ी, छत्िीसगढी, फुन्देरी आहद भशभरमेआ भें यचनाएॉ इन साइटेआ को बेजीॊ, कुछ ई कवविा के भॊच ऩय बी प्रस्त्िुि कीॊ. दु्ि हुआ कक एक फोरी के ऩऺधय ने ककसी अन्म फोरी की यचना भें कोई रूचच नहीॊ हदिाई। इस जस्त्थनि का राब अॊग्रेजी के ऩऺधय रे यहे हेऄ।
उदूा के प्रनि आकषाण सहज स्त्वाबाववक है। वह अॊग्रेजेआ के ऩहरे भुग़र कार भें शासन-प्रशासन कीबाषा यही है। हभाये घयेआ के ऩुयाने कागजाि उदूा भरवऩ भें हेऄ जजन्हें हभाये ऩूवाजेआ ने भरिा है। उदूा की उस्त्िाद-शाचगदा ऩयॊऩया इस शैरी को रगािाय आगे फढािी औय नमे यचनाकायेआ को भशल्ऩ की फायीककमाॉ भसकिी हेऄ। हहन्दी भें जानकाय नमी करभेआ को हिोत्साहहि मा उऩेक्षऺि कयने भें गौयव भानिे हेऄ। अॊियजार आने के फाद जस्त्थनि भें फदराव आ यहा है। ककन्िु अबी बी यचना की कभी फिाने ऩय हहन्दी का कवव उसे अऩनी शैरी कहकय भशल्ऩ, व्माकयण मा वऩॊगर के ननमभ भानने को िैमाय नहीॊ होिा। शुद्ध शब्द अऩनाने के स्त्थान ऩय उसे जक्रष्ट कहकय फचिा है। उदूा भें ऩाद हटप्ऩणी भें अचधक कहठन शब्द का अथा देने की यीनि हहन्दी भें अऩनाना एक सभाधान हो सकिा है।
हभ यचना के कथ्म के अनुकूर शब्देआ का चमन कय अऩनी फाि कहें… जहाॉ रगिा हो कक ककसी शब्द ववशेष का अथा साभान्म ऩाठक को सभझने भें कहठनाई होगी वहाॉ अथा कोष्ठक मा ऩाद हटप्ऩणी भें दे दें। ककसी ऩाठक को कोई शब्द कहठन मा नमा रगे िो वह शब्द कोष भें अथा देि रे मा यचनाकाय से ऩूछ रे।
एक सावधानी यिनी होगी। अॊग्रेजी के नमे शब्द कोष भें हहन्दी के हजायेआ शब्द सभाहहि ककमे गमे हेऄ ककन्िु कई जगह उनके अथा/बावाथा गरि हेऄ… हहन्दी भें अन्मर से शब्द ग्रहण कयिे सभम शब्द का भरॊग, वचन, किमारूऩ, अथा, बावाथा िथा प्रमोग शब्द कोष भें हो िो उऩमोचगिा भें वृवद्ध होगी। मह भहान कामा सेऄकड़ेआ हहन्दी प्रेभभमेआ को भभरकय कयना होगा. ववववध ववषमेआ के ननष्णाि जन अऩने ववषमेआ के शब्द-अथा दें जजन्हें हहन्दी शब्द कोष भें जोड़ा जामे।
38 शब्देआ का फहहष्काय नहीॊ अवऩिु बाषा के सॊस्त्काय, प्रवृजत्ि, यवानगी, प्रवाह िथा अथावत्िा को फनामे यिना है चूॉकक इनके बफना कोई बाषा जीवॊि नहीॊ होिी।
ननष्कषण
हय बायिीम मह जनिा है कक ऩूये बायि भें फोरी-सभझी जाने वारी बाषा हहन्दी औय केवर हहन्दी ही हो सकिी है िथा ववचव स्त्िय ऩय बायि की बाषाओीँ भें से केवर हहन्दी ही ववचव बाषा कहराने की अचधकायी है ककन्िु सच को जानकय बी न भानने की प्रवृजत्ि हहन्दी के भरमे घािक हो यही है।
हहन्दी के सभऺ सफसे फड़ी सभस्त्मा ववचव की अन्म बाषाओीँ के साहहत्म को आत्भसाि कय हहन्दी भें अभबव्मक्ि कयने की िथा ऻान-ववऻान की हय शािा की ववषम-वस्त्िु को हहन्दी भें अभबव्मक्ि कयने की है। हहन्दी के शब्द कोष का ऩुनननाभााण ऩयभावचमक है। इसभें ऩायॊऩरयक शब्देआ के साथ ववववध फोभरमेआ, बायिीम बाषाओीँ, ववदेशी बाषाओीँ, ववववध ववषमेआ औय ववऻान की शािाओॊ के ऩरयबावषक शब्देआ को जोड़ा जाना जरूयी है।
सन्दभण सूचच
[1]. चमाभ चॊद्र कऩूय, “सयर हहन्दी व्माकयण औय यचना”, ऩृष्ठ 132-135 [2]. कवविा कुभाय, “हहन्दी व्माकयण: एक नवीन दृजष्टकोण”, ऩृष्ठ 214
[3]. यवीॊद्र कुभाय ऩाठक, “हहॊदी-व्माकयण के नवीन क्षऺनिज: हहॊदी-व्माकयण की सैद्धाॊनिकी”, ऩृष्ठ 126 [4]. डॉ. भनीषा शभाा, “व्माकयण दभशाका”, ऩृष्ठ 3, 25
[5]. bharatdiscovery.org/india/हहन्दी_साहहत्म